
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया में अमेरिकी सेना की मौजूदगी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि वे इस मिलिट्री बेस की सुरक्षा को कभी खतरे में नहीं पड़ने देंगे। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में कोई समझौता टूटता है या अमेरिकी सेना पर खतरा आता है, तो उनके पास बेस को सैन्य तरीके से सुरक्षित और मजबूत करने का पूरा अधिकार है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से बात की है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर के बीच में स्थित यह बेस अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। ट्रंप के अनुसार, पिछले एक साल में अमेरिकी सेना के कई ऑपरेशन इन बेस की रणनीतिक स्थिति की वजह से ही सफल रहे हैं।
ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए लीज समझौते पर ट्रंप ने कहा कि वे ब्रिटिश प्रधानमंत्री की स्थिति को समझते हैं। उनके मुताबिक, स्टार्मर ने जो डील की है, वह उस समय की सबसे अच्छी डील हो सकती थी। लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर भविष्य में यह डील टूटती है या बेस पर कोई खतरा आता है, तो वे सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप ने वहां अमेरिकी मौजूदगी पर उठने वाले सवालों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने लिखा, “यह जान लें कि मैं इतने महत्वपूर्ण बेस पर हमारी मौजूदगी को कभी भी झूठे दावों या पर्यावरण के नाम पर होने वाली बातों से कमजोर नहीं पड़ने दूंगा।”
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी इस संदेश को दोहराया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने स्टार्मर से सीधे बात की थी और वे उनकी स्थिति का समर्थन करते हैं। लेविट ने जोर देकर कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दुनिया में कहीं भी, जिसमें डिएगो गार्सिया भी शामिल है, अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका अपनी संपत्ति की रक्षा करने का अधिकार रखता है। डिएगो गार्सिया अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण विदेशी सैन्य ठिकानों में से एक है। यह मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण एशिया में अमेरिकी सैन्य शक्ति के लिए एक मुख्य केंद्र के रूप में काम करता है। यह द्वीप लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र भी रहा है। फिलहाल लेविट ने लीज समझौते या भविष्य के फैसलों के लिए किसी समय सीमा की जानकारी नहीं दी है।
