- पुलिस के क्लेरिकल स्टाफ को बेसिक ट्रेनिंग से छूट
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने अनुसचिवीय संवर्ग (क्लेरिकल स्टाफ) में शामिल उन कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत दी है, जो साल 2011 से पहले भर्ती हुए थे। इन कर्मचारियों का पुलिस का बुनियादी प्रशिक्षण कभी पूरा नहीं हो पाया था और अब डीजीपी कैलाश मकवाणा के आदेश से उन्हें इससे पूरी तरह छूट दी गई है। डीजीपी के अनुमोदन के बाद पीएचक्यू की प्रशासन शाखा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सूबेदार (अ), कनिष्ठ शीघ्रलेखक और सहायक उप निरीक्षक (अ) पदों पर 2011 से पहले भर्ती हुए कर्मचारियों का बुनियादी प्रशिक्षण नियम के मुताबिक नहीं हो सका था। इसलिए पूरे प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों में तैनात ऐसे सभी कर्मचारियों को अब बुनियादी ट्रेनिंग से छूट दी जा रही है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए अहम है जो सालों से बिना औपचारिक प्रशिक्षण के काम कर रहे थे। प्रदेश के पुलिस विभाग में 2013 से नया कोर्स क्लेरिकल स्टाफ के लिए डिजाइन किया गया था। उससे पहले क्लेरिकल स्टाफ को रिक्रूट करते ही किसी अफसर या दफ्तर में अटैच कर दिया जाता था।
ट्रेनिंग सेंटर में जाकर नहीं बहाना पड़ेगा पसीना
एमपी पुलिस में लगभग 6 हजार मिनिस्ट्रियल संवर्ग के कर्मचारी हैं। इनमें से अधिकांश 2011 से पहले ही भर्ती हुए थे। आमतौर पर प्रदेश पुलिस में नए भर्ती होने वाले कर्मचारियों का बुनियादी प्रशिक्षण कई महीनों का होता है। कांस्टेबल स्तर पर यह करीब 9 महीने का होता है, जिसमें शारीरिक फिटनेस, परेड, ड्रिल, हथियार चलाना, कानून की जानकारी, साइबर अपराध, जांच प्रक्रिया और व्यवहार संबंधी ट्रेनिंग दी जाती है।
