- मिशन 2028-2029 के लिए जातीय समीकरण से क्षेत्रीय संतुलन तक फोकस
विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया। इस टीम में मध्यप्रदेश को अपेक्षा से कहीं अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। प्रदेश के नेताओं को मिली जिम्मेदारियों को केवल संगठन विस्तार की कवायद मानना मुश्किल है। नियुक्तियों की सूची को गौर से देखें तो इसमें मालवा, निमाड़, चंबल और बुंदेलखंड से लेकर आदिवासी, दलित, ओबीसी, महिला, किसान, युवा और सवर्ण वर्ग तक को साधने की कोशिश दिखाई देती है। यही वजह है कि भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी को राजनीतिक गलियारों में ‘सुपर-6 फॉर्मूला’ के तौर पर देखा जा रहा है। नई टीम में मध्यप्रदेश से लाल सिंह आर्य, गजेंद्र सिंह पटेल, कविता पाटीदार, वीडी शर्मा, आशीष ऊषा अग्रवाल और बंशीलाल गुर्जर जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिली हैं। इसके अलावा संगठनात्मक जिम्मेदारियों के जरिए प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय प्रभाव वाले नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय किया गया है। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में मप्र का सुपर-6 फॉर्मूला देखकर साफ-साफ कहा जा सकता है कि यह मिशन 2028-2029 को फतह करने की रणनीति है। इसके माध्यम से पार्टी ने जातीय समीकरण से क्षेत्रीय संतुलन तक फोकस पर फोकस किया गया है। पार्टी की इस कवायद का एक बड़ा संदेश यह है कि अब राष्ट्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व केवल बड़े चुनावी चेहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसे नेताओं को भी जिम्मेदारी मिलेगी जिनकी अपनी सामाजिक या संगठनात्मक पकड़ है। राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश से आठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। मध्यप्रदेश से राष्ट्रीय टीम में शामिल चेहरों की सबसे खास बात यह है कि हर नेता अपने साथ अलग राजनीतिक और सामाजिक आधार लेकर आता है। भाजपा ने इन चेहरों के जरिए एक तरह से प्रदेश के भीतर मौजूद अलग-अलग राजनीतिक प्रभाव क्षेत्रों को राष्ट्रीय संगठन से जोडऩे का प्रयास किया है।
‘जातीय विजन’ के साथ क्षेत्रीय संतुलन
भाजपा की नई टीम को केवल नामों की सूची के रूप में देखने के बजाय उसके पीछे छिपे सामाजिक और भौगोलिक गणित को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश से आए नेताओं को देखें तो एक तरफ आदिवासी प्रतिनिधित्व है, दूसरी तरफ दलित चेहरा। ओबीसी और महिला नेतृत्व है तो किसान प्रतिनिधित्व भी है। वहीं ब्राह्मण, युवा और कारोबारी वर्ग से जुड़ा चेहरा भी राष्ट्रीय संगठन में शामिल है। इसी तरह क्षेत्रीय स्तर पर भी संतुलन दिखाई देता है। निमाड़ से गजेंद्र पटेल, चंबल से लाल सिंह आर्य, मालवा से कविता पाटीदार और बंशीलाल गुर्जर, बुंदेलखंड से वीडी शर्मा और ग्वालियर-चंबल से आशीष अग्रवाल—यह फैलाव पार्टी को प्रदेश के अलग-अलग राजनीतिक भूगोल से जोड़ता है। यानी नियुक्तियों में एक तरफ जातीय समीकरण, दूसरी तरफ क्षेत्रीय समीकरण और तीसरी तरफ संगठनात्मक क्षमता को साथ रखने की कोशिश की गई है।
ओबीसी और आदिवासी राजनीति पर खास फोकस
मध्यप्रदेश की राजनीति में ओबीसी और आदिवासी वर्ग का महत्व लगातार बढ़ा है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इन वर्गों के समर्थन को भाजपा की चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में इन वर्गों से आने वाले नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना राजनीतिक रूप से स्वाभाविक रणनीति भी है। गजेंद्र पटेल और कविता पाटीदार जैसे चेहरे इस समीकरण के दो अलग हिस्सों को जोड़ते हैं। एक तरफ आदिवासी बहुल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व है, दूसरी तरफ ओबीसी और महिला नेतृत्व का। बंशीलाल गुर्जर के रूप में किसान और ओबीसी समीकरण भी जुड़ जाता है। यानी भाजपा ने प्रदेश के सामाजिक समीकरण को राष्ट्रीय संगठन में एक छोटे मॉडल के रूप में पेश किया है।
गजेंद्र सिंह पटेल:निमाड़ का आदिवासी चेहरा
खरगोन-बड़वानी क्षेत्र से लगातार दो बार लोकसभा सांसद रहे गजेंद्र सिंह पटेल को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिलना मध्यप्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियुक्तियों में से एक है। पटेल की पहचान निमाड़ के आदिवासी क्षेत्र में मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने खरगोन सीट से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। राष्ट्रीय संगठन में उनकी भूमिका का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मध्यप्रदेश भाजपा लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करने पर जोर देती रही है। निमाड़ से दिल्ली तक पहुंचने वाली यह नियुक्ति आदिवासी प्रतिनिधित्व के साथ-साथ पश्चिमी मध्यप्रदेश की राजनीतिक आवाज को भी राष्ट्रीय मंच देती है। गजेंद्र पटेल के जरिए भाजपा एक साथ दो संदेश देती दिखाई देती है-पहला, आदिवासी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर जगह और दूसरा, जमीनी संगठन से निकले नेताओं को बड़े दायित्व का भरोसा।
लाल सिंह आर्य: चंबल के दलित समीकरण का चेहरा
गोहद और भिंड-चंबल क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने से पार्टी ने दलित प्रतिनिधित्व को मजबूत किया है। आर्य मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं और भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा चंबल के उस सामाजिक भूगोल से जुड़ी है जहां जातीय समीकरण चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी केवल संगठनात्मक पद नहीं बल्कि भाजपा के दलित संपर्क अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। आर्य की नियुक्ति यह संकेत देती है कि पार्टी अनुसूचित जाति वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच को केवल चुनावी अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहती। संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देकर इस वर्ग के नेताओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक स्थान देने की कोशिश दिखाई देती है।
कविता पाटीदार: महिला और ओबीसी का दोहरा संदेश
मालवा की राजनीति में सक्रिय राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिलना भी कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। वह पूर्व मंत्री भेरूलाल पाटीदार की बेटी हैं और इंदौर-मालवा क्षेत्र की राजनीति से जुड़ी हैं। उनकी नियुक्ति में भाजपा को महिला और ओबीसी—दोनों सामाजिक समीकरणों को साधने का अवसर मिलता है। यही वजह है कि कविता पाटीदार की राष्ट्रीय भूमिका को केवल महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर देखना अधूरा होगा। यह मध्यप्रदेश के उस मजबूत ओबीसी राजनीतिक आधार को भी राष्ट्रीय संगठन में जगह देने का संकेत है, जिसने राज्य की राजनीति में भाजपा को लंबे समय से मजबूती दी है। पार्टी के लिए कविता पाटीदार का चेहरा खास इसलिए भी है क्योंकि वे अपेक्षाकृत नई पीढ़ी के नेतृत्व और पुराने राजनीतिक-संगठनात्मक नेटवर्क के बीच एक पुल का काम कर सकती हैं।
वीडी शर्मा: चुनावी अनुभव से संगठनात्मक समन्वय तक
खजुराहो से सांसद और मध्यप्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को राष्ट्रीय संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। फरवरी 2020 से जुलाई 2025 तक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे शर्मा के कार्यकाल में पार्टी ने संगठन और चुनावी अभियान के स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए। अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रकोष्ठों के समन्वय का दायित्व मिलने से उनकी संगठनात्मक भूमिका का दायरा और बढ़ गया है। यह नियुक्ति उस चर्चा को भी विराम देती है जिसमें उनके केंद्र में मंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकातों के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं, लेकिन पार्टी ने उनकी संगठनात्मक क्षमता का इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर करने का फैसला किया। शर्मा की खासियत यह मानी जाती है कि वे संगठन, संघ पृष्ठभूमि और चुनावी प्रबंधन—तीनों के बीच समन्वय स्थापित करने में सक्षम रहे हैं। इसलिए राष्ट्रीय टीम में उनकी जिम्मेदारी को आने वाले चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आशीष ऊषा अग्रवाल: युवा और कारोबारी वर्ग को संदेश
ग्वालियर से आने वाले आशीष ऊषा अग्रवाल को राष्ट्रीय सह-मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। अपेक्षाकृत युवा चेहरे को राष्ट्रीय टीम में स्थान देकर भाजपा ने संगठन में नई पीढ़ी की भागीदारी का संकेत दिया है। आईटी और सोशल वर्क की पृष्ठभूमि वाले अग्रवाल कॉरपोरेट क्षेत्र का अनुभव भी रखते हैं। मध्यप्रदेश में मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल चुके अग्रवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के मीडिया नेटवर्क में भूमिका निभाएंगे। उनकी नियुक्ति का एक और पहलू है—युवा और कारोबारी वर्ग। भाजपा जिस तरह डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और आधुनिक संचार माध्यमों पर अपना फोकस बढ़ा रही है, उसमें युवा चेहरों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। ऐसे में अग्रवाल को राष्ट्रीय मीडिया टीम में जगह मिलना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
बंशीलाल गुर्जर: किसान राजनीति का चेहरा
मंदसौर-मालवा क्षेत्र से आने वाले राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर को राष्ट्रीय टीम में किसान चेहरे के रूप में जगह मिली है। किसान कल्याण आयोग के पूर्व अध्यक्ष और किसान मोर्चे में लंबे संगठनात्मक अनुभव के कारण उनकी पहचान किसान राजनीति से जुड़ी रही है। मंदसौर क्षेत्र का राजनीतिक महत्व अलग है। किसान आंदोलन और कृषि मुद्दों के कारण यह इलाका राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा है। ऐसे में गुर्जर को राष्ट्रीय संगठन में भूमिका देकर भाजपा ने किसान वर्ग के साथ अपने संवाद को मजबूत करने का संदेश दिया है। यह नियुक्ति खास तौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खेती-किसानी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल बीमा, सिंचाई और कृषि लागत जैसे मुद्दे मध्यप्रदेश की राजनीति में लगातार प्रभावी रहते हैं। किसान पृष्ठभूमि वाले नेता को राष्ट्रीय संगठन में जगह देकर पार्टी इस वर्ग के बीच राजनीतिक संवाद का एक मजबूत माध्यम तैयार कर सकती है।
वीडी शर्मा की भूमिका पर सबसे ज्यादा नजर
इन नियुक्तियों में सबसे ज्यादा चर्चा वीडी शर्मा की भूमिका को लेकर है। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनके कार्यकाल में भाजपा ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया था। अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रकोष्ठों के समन्वय की जिम्मेदारी मिलने से उनकी राजनीतिक उपयोगिता का दायरा बढ़ा है। उनकी भूमिका भविष्य में पार्टी के विभिन्न फ्रंटल संगठनों और प्रकोष्ठों को एक साथ जोडऩे में महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे मध्यप्रदेश भाजपा को भी राष्ट्रीय संगठन के भीतर एक अनुभवी समन्वयक का लाभ मिलेगा।
