
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जरूरी संशोधन करने का आदेश दिया था
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। आज गांधी जयंती है। दो गांधी जयंती बीत गई और तीसरी आ गई, लेकिन मप्र सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह अधिनियम-2024 का क्रियान्वयन नहीं हो पाया। पहले नए जेल अधिनियम के नियम (रूल्स) अंग्रेजी में नहीं बनाए जाने के कारण इसका क्रियान्वयन अटक गया था और फिर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक्ट में जरूरी संशोधन करने के संबंध में आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साल भर बाद भी सरकार नए अधिनियम को लागू नहीं कर पाई है। अधिकारियों का कहना है कि एक्ट में जरूरी संशोधन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। दरअसल, मप्र विधानसभा के जुलाई, 2024 में आयोजित मानसून सत्र में मप्र सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक 2024 पारित किया गया था। सरकार ने नया जेल अधिनियम 2 अक्टूबर, 2024 से क्रियान्वित करने की तैयारी की थी। इसको लेकर 13 अगस्त, 2024 को नोटिफिकेशन जारी किया गया था। विभाग एक्ट के नियम अंग्रेजी में बनाना भूल गया था, इसलिए इसका क्रियान्वयन नहीं हो पाया। फिर इस अधिनियम का क्रियान्वयन एक जनवरी, 2025 से किए जाने के संबंध में सरकार ने पुराने नोटिफिकेशन को अधिक्रमित करते हुए गत 30 सितंबर को नया नोटिफिकेशन जारी किया। जेल मुख्यालय निर्धारित समयावधि में अंग्रेजी में एक्ट के नियम तैयार नहीं कर पाया, इस कारण इसे एक जनवरी, 2025 से लागू नहीं किया जा सका। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से नए जेल अधिनियम में संशोधन करने का आदेश जारी कर दिया। जेल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने नए जेल अधिनियम में बंदियों के मौलिक अधिकारों का पूर्ण संरक्षण करने पर जोर दिया है। विशेषकर उनकी कानूनी सहायता और मानवाधिकारों से संबंधित प्रावधानों में। कोर्ट ने जेलों में पारदर्शिता बढ़ाने और एक समिति गठित करने का सुझाव दिया है, ताकि कैदियों के साथ होने वाले व्यवहार की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित हो। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नए जेल अधिनियम को लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल इसलिए अटकी हुई है, क्योंकि कोर्ट के आदेश के अनुसार पुराने एक्ट में जरूरी संशोधन अभी पूरे नहीं हुए हैं। जेल संचालनालय साल भर से इन संशोधनों की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने से लेकर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने की कार्रवाई चल रही है, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। यही वजह है कि एक्ट का क्रियान्वयन अटका हुआ है।
नया एक्ट अमल में आने पर कई चीजें बदलेंगी
मप्र सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह अधिनियम-2024 में जेल विभाग का नाम बदलकर बंदीगृह एवं सुधारात्मक विभाग और जेल मुख्यालय का नाम सुधारात्मक एवं बंदीगृह संचालनालय किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसमें जेलों का नाम बंदीगृह एवं सुधारात्मक संस्था करने, जेल अधिकारी का पदनाम सुधारात्मक सेवाएं अधिकारी करने का प्रावधान किया गया है। नए एक्ट में जेलों में बंदियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने और ओवर क्राउडिंग कम करने पर सबसे ज्यादा फोकस है। महिला बंदियों के लिए सेपरेट वार्ड व बैरक बनाने व महिला प्रहरियों की तैनाती एवं जेल के अस्पतालों में बंदियों की संख्या के हिसाब से बेड की संख्या निर्धारित करने के साथ ही बंदियों को खाने में सलाद देने, चाय के लिए दूध की मात्रा बढ़ाने, महिला बंदियों को हर सप्ताह 10 मिली शैम्पू देने, खाने के तेल की मात्रा में वृद्धि करने, प्रत्येक केंद्रीय जेल के साथ ओपन जेल बनाने आदि प्रावधान किए गए है। एक्ट में जेलों में बंद खूंखार अपराधियों व गैंगस्टर पर कड़े नियंत्रण का प्रावधान है।
