50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य, 10 दिन में हुईं सिर्फ 1.75 लाख

  • स्वामित्व योजना की रफ्तार धीमी, तय समय में लक्ष्य हासिल करना चुनौती
  • गौरव चौहान
रजिस्ट्री का लक्ष्य

गांवों में मकान और भूखंड के मालिकाना हक के दस्तावेज नि:शुल्क देने की स्वामित्व योजना मध्यप्रदेश में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। सरकार ने एक महीने में 50 लाख रजिस्ट्री करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन पटवारियों के काम शुरू करने के बाद भी आंकड़ा अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहा है। 12 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक करीब 10 दिनों में लगभग 1.75 लाख रजिस्ट्री ही हो सकीं। इस रफ्तार से लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबा समय लग सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल भी कम प्रगति पर कलेक्टरों को फटकार लगा चुके हैं।
प्रदेश सरकार ने 17 सितंबर को स्वामित्व योजना के शुभारंभ के दौरान एक महीने में 50 लाख निशुल्क रजिस्ट्री का लक्ष्य तय किया था। हालांकि, पटवारियों के रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल नहीं होने से शुरुआत में ही काम अटक गया। पटवारियों ने 12 अक्टूबर से रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद 21 अक्टूबर तक करीब 1.75 लाख रजिस्ट्री हुईं। यानी शुरुआती 10 दिनों में लक्ष्य का एक छोटा हिस्सा ही पूरा हो पाया। इस गति से 50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य हासिल करने के लिए कई महीने लग सकते हैं। पटवारियों के मुताबिक सर्वर डाउन रहने और दूसरे प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के कारण रजिस्ट्री की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में सरकार के सामने अब तय समय में लक्ष्य पूरा करने के साथ तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं दूर करने की चुनौती भी है।
सीएम की नाराजगी के बाद जिलों पर बढ़ा दबाव
स्वामित्व योजना में धीमी प्रगति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टर-कमिश्नर और पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कम रजिस्ट्री पर नाराजगी जताई। शून्य प्रगति वाले हल्कों की जानकारी सामने आने पर रीवा, शहडोल और धार के कलेक्टरों को तत्काल काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने भी न्यूनतम प्रगति वाले 10 जिलों के कलेक्टरों को फौरन सुधार करने को कहा। प्रशासनिक स्तर पर सख्ती के बावजूद अब देखना होगा कि जिलों में रजिस्ट्री का आंकड़ा कितनी तेजी से बढ़ता है।
पटवारियों की नाराजगी से अटकी थी योजना
योजना की शुरुआत से ही पटवारियों ने रजिस्ट्री कराने से इनकार कर दिया था। उन्हें काम पर लाने के लिए शासन स्तर पर 10 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें हुईं। राजस्व मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों और पांच मंत्रियों की समिति ने भी पटवारी संघ के प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। मुख्य सचिव की चेतावनी और निलंबन-बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई के बावजूद पटवारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। सरकार ने करीब 3500 पटवारियों को नोटिस जारी किए, 100 से अधिक को निलंबित किया और 29 को बर्खास्त किया। आखिरकार 9 अक्टूबर की रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ पटवारी संघ के प्रतिनिधियों की मुलाकात में मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद पटवारी 12 अक्टूबर से रजिस्ट्री के काम में जुटे।
छिंदवाड़ा आगे, पांढुर्णा सबसे पीछे
21 अक्टूबर तक के आंकड़ों में छिंदवाड़ा 8,530 रजिस्ट्री के साथ प्रदेश में सबसे आगे रहा। रीवा 7,563 और सागर 7,289 रजिस्ट्री के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। राजगढ़ में 6,285, छतरपुर में 6,128, नरसिंहपुर में 6,042, सतना में 5,620, शिवपुरी में 5,131, विदिशा में 4,850, सिवनी में 4,736, जबलपुर में 4,269 और ग्वालियर में 3,925 रजिस्ट्री दर्ज की गईं। इसके उलट बड़े शहरों और कुछ जिलों में प्रगति काफी कम रही। भोपाल में 967, इंदौर में 883, उमरिया में 903, अनूपपुर में 853, आलीराजपुर में 786, मऊगंज में 689 और पांढुर्णा में महज 666 रजिस्ट्री हुईं। पांढुर्णा सूची में सबसे नीचे रहा।
ग्रामीणों को मिलेगा कानूनी मालिकाना हक
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र के मकानों और भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण किया जाता है। इसके आधार पर संपत्ति के अभिलेख तैयार कर पात्र ग्रामीणों को मालिकाना हक के वैधानिक दस्तावेज दिए जाते हैं। इससे संपत्ति पर अधिकार स्पष्ट होता है और ग्रामीणों को बैंक ऋण सहित दूसरी वित्तीय सुविधाएं हासिल करने में मदद मिल सकती है। योजना का लाभ सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाने के लिए अब रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी लाना जरूरी है। सरकार के सामने चुनौती सिर्फ 50 लाख रजिस्ट्री का आंकड़ा छूने की नहीं, बल्कि सर्वर की दिक्कतों, कर्मचारियों की व्यस्तता और जिलों के बीच प्रगति के बड़े अंतर को दूर करने की भी है।

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