गांवों में जाने से कतरा रहे भाजपा के मंत्री-विधायक

  • खाद-बिजली की किल्लत में घेराबंदी का डर

गौरव चौहान
दीपावली और गोवर्धन पूजा के बहाने गांवों में जनता के बीच पहुंचने की सत्ता और संगठन की रणनीति फिलहाल जमीन पर उतरती नजर नहीं आ रही है। भाजपा के मंत्री, सांसद और विधायक गांवों का रुख करने से बच रहे हैं। वजह है किसानों की नाराजगी। खेतों में रबी फसल की तैयारी चल रही है, लेकिन खाद की किल्लत, खराब ट्रांसफार्मर और बिजली कटौती ने किसानों की परेशानी बढ़ा रखी है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को आशंका है कि गांव पहुंचे तो स्वागत के बजाय उन्हें किसानों के सवालों और विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
दिलचस्प यह है कि सत्ता और संगठन ने चार दिन पहले ही जनप्रतिनिधियों को दीपावली से गोवर्धन पूजा तक गांवों में जाने का निर्देश दिया था। उन्हें ग्रामीणों से संवाद करने, सरकारी योजनाओं का फीडबैक लेने और समस्याओं का मौके पर समाधान कराने को कहा गया था। इसके बावजूद शुक्रवार तक किसी मंत्री, सांसद या विधायक ने अपने गांव दौरे की कार्ययोजना सार्वजनिक नहीं की थी।
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने दिए थे निर्देश
पिछली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री की ओर से मंत्रियों और विधायकों को दीपावली एवं गोवर्धन पूजा के दौरान गांवों में पहुंचने के लिए कहा गया था। अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए थे कि वे जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर उनकी सुविधा के अनुसार गांवों का चयन करें और दौरे के दौरान स्वयं भी मौजूद रहें। जनप्रतिनिधियों को ऐसे गांव चुनने थे, जहां नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान के तहत शत-प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की उपलब्धियां बताने के साथ ग्रामीणों से सीधा संवाद करना था। लेकिन गांवों में मौजूदा हालात को देखते हुए जनप्रतिनिधि इस कार्यक्रम को लेकर सहज नहीं दिख रहे हैं।
 खाद की किल्लत से किसान परेशान
 रबी फसल की बुवाई के लिए किसान खेत तैयार कर रहे हैं। कम बारिश के कारण कई किसान समय से पहले बुवाई करना चाहते हैं, लेकिन खाद की उपलब्धता परेशानी बनी हुई है। खाद की कमी को लेकर 6392 लोगों ने सीएम हेल्पलाइन सहित विभिन्न माध्यमों से शिकायतें की हैं। ऐसे में आशंका है कि किसान गांव पहुंचने वाले नेताओं से खाद की उपलब्धता को लेकर जवाब मांग सकते हैं।
ट्रांसफार्मर खराब, किसान लगा रहे चक्कर
 कई गांवों में कृषि पंपों के लिए लगाए गए ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं, जबकि कुछ ट्रांसफार्मर बढ़ा हुआ लोड नहीं उठा पा रहे। किसानों का आरोप है कि कई महीनों से ट्रांसफार्मर बदलने की मांग की जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। कुछ स्थानों पर बकाया बिजली बिल का पूरा भुगतान होने के बाद ही ट्रांसफार्मर बदलने की बात कही जा रही है। इस समस्या को लेकर 2876 शिकायतें दर्ज हुई हैं।
दस घंटे बिजली देने के दावे पर सवाल
 सरकार खेती के लिए प्रतिदिन 10 घंटे बिजली देने का दावा कर रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से इतनी बिजली नहीं मिल रही। बार-बार कटौती और फॉल्ट के कारण आपूर्ति बाधित होती है। बिजली बंद रहने की अवधि की भरपाई भी नहीं की जाती। नतीजतन किसानों को खेतों में रातभर पंप चालू करने के लिए बिजली का इंतजार करना पड़ता है। कई गांवों में किसान संगठन इस मुद्दे पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
संगठन के निर्देश और जमीनी हकीकत में फासला
सूत्रों के मुताबिक, कुछ मंत्री, विधायक और सांसदों ने सत्ता एवं संगठन के सामने गांवों में अप्रिय स्थिति बनने की आशंका जताई है। हालांकि किसी ने गांव जाने से साफ इनकार नहीं किया है, लेकिन दौरे की योजना बनाने में हिचक दिखाई दे रही है। सत्ता और संगठन की मंशा त्योहार के बहाने जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच पहुंचाकर सरकार की योजनाओं का फीडबैक लेने की थी। लेकिन खाद, बिजली और ट्रांसफार्मर की समस्याओं ने इस राजनीतिक कवायद को मुश्किल बना दिया है। अब चुनौती गांव पहुंचने की नहीं, बल्कि वहां किसानों के सवालों का जवाब देने की है। योजनाओं का फीडबैक लेने निकले जनप्रतिनिधियों को कहीं अपनी ही सरकार की व्यवस्थाओं पर जवाब न देना पड़ जाए, यही चिंता उनके कदम रोक रही है।

Related Articles