
- प्रांत की जगह संभाग, जिलों की संख्या भी होगी दोगुनी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने बढ़ते कार्यक्षेत्र के अनुरूप संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसमें वर्तमान प्रांत व्यवस्था के स्थान पर संभाग बनाए जा सकते हैं। वहीं, अभी 922 जिलों की संख्या बढ़ाकर लगभग दोगुनी करने पर विचार किया जा रहा है। बताया गया कि वर्तमान में देश में 11 क्षेत्र हैं, जिनकी संख्या घटकर नौ रह जाएगी। 46 प्रांतों के स्थान पर 85 संभाग बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही प्रदेश प्रचारक और प्रदेश कार्यालय की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव भी है। संगठन का मानना है कि कार्यक्षेत्र छोटा होने से पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
प्रस्तावित संगठनात्मक बदलाव मार्च 2027 से लागू किया जा सकता है: संघ की योजना संगठनात्मक गतिविधियों को संभाग, जिला और नगर से आगे बढ़ाकर बस्तियों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की है। प्रस्तावित संगठनात्मक बदलाव मार्च 2027 से लागू किया जा सकता है। वहीं, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का अधिवेशन तीन वर्ष में एक बार, क्षेत्रीय स्तर पर साल में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। हालांकि, कार्यसमिति की मूल संरचना पहले जैसी रहने की संभावना है।
नशामुक्ति के लिए सामाजिक संस्थाओं का लिया जाएगा सहयोग: बैठक के दूसरे दिन करीब पांच सत्र हुए। इनमें युवाओं में बढ़ते नशीले पदार्थों के सेवन पर चिंता जताते हुए इसके विरुद्ध सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया। बैठक का समापन बुधवार को होगा। बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने राष्ट्र चेतना के अग्रदूत राजनारायण बसु के द्विशताब्दी वर्ष के संदर्भ में उनका स्मरण किया। सात दिसंबर 1826 को बंगाल में जन्मे बसु ने निर्धनों के उत्थान, नशामुक्ति, महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह जैसे सामाजिक सुधारों के लिए काम किया।
46 प्रांतों की जगह 85 से 90 संभाग बनाने पर मंथन: बताया गया कि वर्तमान में देश में 11 क्षेत्र हैं, जिनकी संख्या घटकर नौ रह जाएगी। 46 प्रांतों के स्थान पर 85 से 90 संभाग बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही राज्य प्रचारक और राज्य कार्यालय की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव भी है। संगठन का मानना है कि कार्यक्षेत्र छोटा होने से पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
इंदौर में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक मध्यप्रदेश के इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक होगी। इसमें शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा भी की जाएगी। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह-सरकार्यवाह शामिल होंगे। सभी अखिल भारतीय विभागों के प्रमुख और संगठन की कार्यकारी संस्था के सदस्य भी बैठक में हिस्सा लेंगे।
देशभर से आए पदाधिकारियों ने सुझाव रखे
इंदौर के डेली कॉलेज में चल रही संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दूसरे दिन मंगलवार को इन प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में देशभर से आए पदाधिकारियों ने सुझाव रखे।
बैठकों की अवधि और जगह में बदलाव
संघ की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक अब हर साल नहीं होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यह बैठक हर तीन साल में नागपुर में आयोजित की जाएगी। क्षेत्रीय स्तर की बैठकें हर दो साल में होंगी। इन बदलावों का उद्देश्य क्षेत्रों, संभागों और राज्य स्तर की इकाइयों के बीच तालमेल मजबूत करना है। बदलाव लागू होने के बाद संघ के प्रशासनिक और संगठनात्मक ढांचे में बड़ा पुनर्गठन होगा। इससे क्षेत्रों, संभागों और राज्य इकाइयों के बीच समन्वय के लिए नई व्यवस्था बनेगी।
