- गांवों में योग से लेकर गर्भवती महिलाओं की आयुष किट तक, पंचायत बनेगी सेहत का नया केंद्र
- गौरव चौहान

अब गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता के लिए पंचायत स्तर पर योग, खानपान और जीवनशैली सुधार पर जोर देने की तैयारी है। मध्यप्रदेश में प्रस्तावित ‘आयुष से आरोग्य’ अभियान के तहत पंचायतों को ग्रामीणों तक आयुष सेवाएं पहुंचाने की कड़ी बनाया जाएगा। योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से वात, पित्त और कफ की स्थिति का आकलन करने तथा संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के शुरुआती संकेत पहचानने की पहल भी शामिल है। इसके साथ गर्भवती महिलाओं को आयुष किट देने और कुपोषण से मुकाबले के लिए दूसरे विभागों के साथ मिलकर काम करने की योजना है।
आयुष विभाग इस अभियान को पंचायत, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से लागू करने की तैयारी कर रहा है। पंचायत विभाग के साथ बैठक हो चुकी है, जबकि गर्भवती महिलाओं को आयुष किट देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक प्रस्तावित है। फिलहाल योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
हर गांव में योगाभ्यास की व्यवस्था बनाने की तैयारी
अभियान का एक प्रमुख हिस्सा गांवों में नियमित योगाभ्यास को बढ़ावा देना है। पंचायतों को इसके लिए स्थान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यहां योग प्रशिक्षक ग्रामीणों को नियमित अभ्यास कराने के साथ स्वस्थ दिनचर्या, मौसम के अनुसार खानपान और जीवनशैली सुधार की जानकारी देंगे। फिलहाल आयुष वेलनेस सेंटरों में योग प्रशिक्षक उपलब्ध हैं। विभाग इसी मॉडल को गांवों तक विस्तार देने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और परामर्श उनकी पहुंच के भीतर उपलब्ध कराना है।
एआई से शुरुआती संकेत, बीमारी की पुष्टि जांच से
योजना में एआई की मदद से लोगों की प्रकृति और वात, पित्त तथा कफ के असंतुलन का आकलन करने की तैयारी है। इसके आधार पर संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के शुरुआती संकेत पहचानने और जरूरत के मुताबिक आयुष परामर्श देने का प्रयास होगा। खानपान, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार की सलाह भी दी जाएगी। हालांकि, एआई से मिले संकेत किसी बीमारी की पुष्टि नहीं होंगे। इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होगी। इस व्यवस्था की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आकलन की प्रक्रिया कितनी विश्वसनीय है और जरूरतमंद लोगों को आगे की जांच व उपचार की सुविधा कितनी आसानी से मिलती है।
विभागों के तालमेल से लागू होगा अभियान
‘आयुष से आरोग्य’ अभियान को जमीन पर उतारने के लिए पंचायतों, स्वास्थ्य सेवाओं और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। पंचायतों को स्थान उपलब्ध कराना होगा, स्वास्थ्य विभाग को गर्भवती महिलाओं से जुड़ी सेवाओं में सहयोग करना होगा और महिला एवं बाल विकास विभाग को पोषण संबंधी गतिविधियों से जुडऩा होगा। योजना की घोषणा के बाद अब इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, औषधियों के मानक और चिकित्सकीय जांच से जुड़ी व्यवस्था तय होना बाकी है। इन व्यवस्थाओं के स्पष्ट होने के बाद ही गांवों तक अभियान की सेवाओं का वास्तविक दायरा सामने आएगा।
कुपोषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर भी फोकस
महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से जरूरतमंद बच्चों तक पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं पहुंचाने की योजना है। कुपोषण से मुकाबले के लिए आयुष औषधियों के वितरण का भी प्रस्ताव है, जिसके लिए उपयोग और क्रियान्वयन की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी। इसके अलावा नियमित योग, संतुलित आहार और दिनचर्या में सुधार के जरिए मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
गर्भवती महिलाओं को आयुष किट देने की योजना
अभियान में मातृ स्वास्थ्य को भी प्रमुखता दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के लिए आने वाली और पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को आयुष किट देने की तैयारी है। किट में शामिल औषधियों और उनके उपयोग की अंतिम रूपरेखा अभी तय होना बाकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मई को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए केरल और तमिलनाडु की आयुष सेवाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग के चार सदस्यीय दल ने दोनों राज्यों का दौरा किया और अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में केरल में गर्भवती महिलाओं को आयुष किट देने की व्यवस्था का उल्लेख है। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के अनुसार, रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश की जरूरतों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार की जा रही है। गर्भावस्था में किसी भी औषधि का उपयोग चिकित्सकीय सलाह से ही किया जाना चाहिए। आयुष किट नियमित प्रसव पूर्व जांच का विकल्प नहीं होगी।
