- 5 जनवरी के आसपास समिट कराने की तैयारी, लेकिन प्रधानमंत्री की मंजूरी का इंतजार
- 17 जनवरी को सेना का कार्यक्रम, दावोस यात्रा और गुजरात समिट से बढ़ा शेड्यूल का दबाव
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन आयोजन की तारीख अभी प्रधानमंत्री के समय पर अटकी है। सरकार पांच जनवरी के आसपास समिट कराने की तैयारी कर रही है, मगर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण अंतिम कार्यक्रम घोषित नहीं हो पा रहा है। तारीख तय होने में देरी अब सिर्फ औपचारिकता का मामला नहीं रह गई है। इससे निवेशकों को निमंत्रण देने, बड़े उद्योगपतियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और आयोजन स्थल को तैयार करने की समयसीमा पर असर पड़ सकता है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि जनवरी में कई बड़े कार्यक्रम पहले से प्रस्तावित हैं। यदि जीआईएस के लिए प्रधानमंत्री का समय नहीं मिलता और आयोजन आगे बढ़ाना पड़ता है, तो फरवरी में विधानसभा के बजट सत्र के कारण विकल्प सीमित हो सकते हैं। ऐसे में समिट की तारीख तय करने के साथ-साथ आयोजन की पूरी व्यवस्था को समय पर पूरा करना भी अहम हो गया है।
जनवरी में तारीख के लिए कई दावेदार
जनवरी में भोपाल में 17 तारीख को सेना का राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें रक्षा मंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और सेना के शीर्ष अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। इस आयोजन की तैयारियां दिसंबर से शुरू करनी होंगी। ऐसे में प्रशासनिक अमले को जीआईएस और सेना के कार्यक्रम के बीच संसाधनों तथा व्यवस्थाओं का तालमेल बैठाना होगा। इसी महीने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दावोस यात्रा भी प्रस्तावित है, जिसमें वे करीब दस दिन व्यस्त रह सकते हैं। गुजरात में भी निवेशक सम्मेलन होना है। ऐसे में बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यक्रमों के बीच समन्वय जरूरी होगा। सरकार चाहती है कि जीआईएस की तारीख ऐसी हो, जिससे प्रधानमंत्री की मौजूदगी के साथ आयोजन की तैयारियां भी प्रभावित न हों।
तारीख नहीं, तो निमंत्रण भी अधूरे
उद्योग विभाग की टीमें निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए अलग-अलग राज्यों में संपर्क कर रही हैं। लेकिन तारीख तय नहीं होने से औपचारिक निमंत्रण प्रक्रिया को अंतिम रूप देना मुश्किल हो रहा है। बड़े उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के लिए सरकार उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी में है। इसमें अंबानी, अडानी, टाटा और बिड़ला जैसे प्रमुख उद्योग समूहों को शामिल करने पर जोर रहेगा। निवेशकों को कार्यक्रम की तारीख, समय और आयोजन की रूपरेखा पहले से बताना जरूरी है, ताकि वे अपनी भागीदारी तय कर सकें। तारीख घोषित होने में देरी से सरकार के पास संपर्क और औपचारिक निमंत्रण के लिए उपलब्ध समय घट सकता है। हालांकि, उद्योग विभाग की टीमें निवेशकों से संपर्क जारी रखे हुए हैं।
अब पीएमओ के जवाब पर नजर
राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री का समय लेने के लिए पीएमओ को पत्र भेजा है। तारीख की घोषणा इसी पर निर्भर है। फिलहाल आयोजन की तैयारियां जारी हैं, लेकिन अंतिम कार्यक्रम स्पष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री की उपलब्धता तय होते ही तारीख घोषित की जा सकेगी। तब सरकार को सीमित समय में निवेशकों के निमंत्रण, आयोजन स्थल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना होगा।
आयोजन स्थल तैयार, लेकिन काम में लगेगा समय
जीआईएस के लिए सतगढ़ी में आयोजन स्थल पहले से तय है। वहां सडक़ों का चौड़ीकरण शुरू हो गया है, लेकिन समिट के लिए जरूरी व्यवस्थाएं तैयार करने में समय लगेगा। इनमें टेंडर प्रक्रिया, डोम निर्माण, हेलीपैड और निवेशकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करना शामिल है। आयोजन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया और डोम तैयार करने वाले वेंडर को ही करीब एक महीने का समय चाहिए। पिछले वर्ष भी इस तरह की तैयारियों में लगभग दो महीने लगे थे। ऐसे में तारीख घोषित होने में देरी का असर आयोजन स्थल की तैयारियों पर पड़ सकता है। उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के मुताबिक, समिट जनवरी में प्रस्तावित है और प्रधानमंत्री का समय मिलने के बाद ही तारीख तय होगी। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल तय है तथा सडक़ों के चौड़ीकरण का काम शुरू हो चुका है।
फरवरी में बजट सत्र बनेगा बाधा
यदि जनवरी में जीआईएस नहीं हो पाती है, तो फरवरी में आयोजन की तारीख तय करना भी आसान नहीं होगा। महीने के दूसरे पखवाड़े में विधानसभा का बजट सत्र प्रस्तावित है। इस दौरान बजट तैयारियों और सदन की कार्यवाही के कारण सरकार तथा विभागों की व्यस्तता बढ़ेगी। ऐसे में जनवरी का विकल्प हाथ से निकलने पर समिट को आगे बढ़ाने के लिए नई तारीख निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरकार के सामने एक तरफ प्रधानमंत्री की उपलब्धता का इंतजार है, तो दूसरी तरफ आयोजन की तैयारियों और निवेशकों की भागीदारी के लिए समयसीमा बनाए रखने की जरूरत है।
