
- खेतों की सुरक्षा के नाम पर तारों में दौड़ाया जा रहा बिजली का करंट
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में जंगलों के आसपास खेतों की सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे बिजली के तार वन्यजीवों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। खेतों में घुसने वाले वन्यप्राणियों को रोकने के लिए तारों में अवैध रूप से करंट दौड़ाया जा रहा है। इसकी चपेट में आकर छोटे वन्यजीवों से लेकर बाघ और तेंदुए जैसे संरक्षित वन्यप्राणी भी जान गंवा रहे हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े धमोखर परिक्षेत्र के महामन गांव में रविवार को करीब दो साल के चीतल की करंट से मौत इसका ताजा उदाहरण है। खेत पर लगाए जीआई तार में करंट दौड़ाया गया था। जंगल से भटककर खेत में पहुंचा चीतल इसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। वन विभाग की रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े इस खतरे की गंभीरता बताते हैं। वर्ष 2014 से 2026 के बीच प्रदेश में फंदे और बिजली के करंट से वन्यजीवों के शिकार के लगभग 1000 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें 322 जंगली सूअर, 118 नीलगाय, 101 तेंदुए, 82 चीतल, 50 सांभर, 36 भालू, 39 बाघ और 17 मोर की मौत दर्ज की गई। इस तरह से औसतन हर साल करंट और फंदे से 80 वन्यजीवों की जान जा रही है।
इस साल करंट से छह बाघों की मौत
प्रदेश के जंगलों में करंट बाघों के लिए भी बड़ा खतरा बनकर सामने आया है। वन विभाग की पूर्व में जारी चार महीने की रिपोर्ट के मुताबिक छह बाघों की मौत करंट लगने से हुई थी। यानी उस अवधि में दर्ज बाघों की कुल मौतों में करीब 21 प्रतिशत मामले करंट से जुड़े थे। इसी रिपोर्ट में नौ बाघों की मौत आपसी संघर्ष से होने की जानकारी भी सामने आई थी। वन्यजीवों के लिए खतरा केवल टाइगर रिजर्व के भीतर तक सीमित नहीं है। रिजर्व से लगे सामान्य वनमंडलों और गांवों के आसपास भी वन्यप्राणियों की आवाजाही रहती है। भोजन और पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलने वाले वन्यजीव खेतों तक पहुंचते हैं। ऐसे में खेतों की सुरक्षा के लिए लगाए गए तारों में अवैध करंट उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
शिकार रोकने चलाना पड़ा ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप
करंट और फंदों से होने वाले अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप चलाया था। विभागीय निर्देशों के अनुसार, 10 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-द्वितीय को मिशन मोड में संचालित करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत प्रदेश के वन क्षेत्रों में दिन और रात में गश्त, संदिग्ध स्थानों की तलाशी और डॉग स्क्वॉड की मदद से निगरानी करने के निर्देश दिए गए थे। इससे पहले एक दिसंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 तक चलाए गए अभियान में विभागीय जानकारी के अनुसार 931 प्रकरण दर्ज हुए थे और 429 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
खेतों की सुरक्षा व वन्यजीव संरक्षण के बीच चुनौती
महामन गांव में चीतल की मौत के बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू की है। धमोखर परिक्षेत्र अधिकारी सचिन सिंह के अनुसार, खेत मालिक की पहचान की जा रही है। मृत चीतल का पोस्टमार्टम कराने के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया। जंगलों के आसपास अवैध रूप से करंट वाले तार लगाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए निगरानी, दोषियों की पहचान और स्थानीय लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। खेतों में फसल बचाने के लिए लगाए गए तार यदि जानलेवा करंट से जुड़े हों, तो वे वन्यजीवों के साथ ग्रामीणों के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसे में वन विभाग के सामने चुनौती केवल शिकार के मामलों में कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि जंगलों की सीमा से लगे क्षेत्रों में इस तरह के जोखिम को रोकने की भी है।
