पदोन्नति का अगला दौर दिसंबर में शुरू होगा

  • 10 साल बाद बहाल हुई प्रमोशन प्रक्रिया में तेजी, दो महीने में फिर होगी डीपीसी

    -वाणिज्यिक कर विभाग ने 160 पदों के लिए शुरू की कवायद; पुलिस में ढाई हजार कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।
    प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया अब अगले दौर में पहुंचने जा रही है। जुलाई 2026 से शुरू हुई पदोन्नतियों के बाद सरकार ने साल के अंत में फिर अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन देने की तैयारी शुरू कर दी है। एक दिसंबर 2025 की स्थिति में रिक्त पदों के आधार पर पदोन्नतियां देने के बाद अब 31 दिसंबर 2026 की स्थिति में उपलब्ध पदों के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें होंगी। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश के बाद वाणिज्यिक कर विभाग ने इसकी पहल करते हुए 160 पदों पर पदोन्नति के लिए राज्य लोक सेवा आयोग के साथ बैठक भी कर ली है। अन्य विभागों में भी तैयारियां चल रही हैं।
    प्रदेश में करीब 10 साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों-कर्मचारियों को जुलाई 2026 से राहत मिलनी शुरू हुई थी। एक दिसंबर 2025 की स्थिति में पदोन्नति के लिए उपलब्ध रिक्त पदों पर अब तक एक लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति दिए जाने की जानकारी है। सरकार अब प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए दिसंबर 2026 की स्थिति में रिक्त पदों पर पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति देने जा रही है। इसके लिए विभागों को डीपीसी की प्रक्रिया समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मकसद यह है कि पात्रता और रिक्त पदों के आधार पर पदोन्नति के अगले अवसर का लाभ कर्मचारियों को मिल सके।
    वाणिज्यिक कर विभाग ने बढ़ाए कदम
    पदोन्नति के अगले दौर की शुरुआत वाणिज्यिक कर विभाग ने कर दी है। विभाग के अंतर्गत वाणिज्यिक कर, आबकारी तथा पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के कुल 160 पदों के लिए राज्य लोक सेवा आयोग के साथ बैठक हो चुकी है। अब संबंधित पदों पर पात्रता के अनुसार पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। दूसरे विभाग भी अपने यहां रिक्त पदों और पात्र कर्मचारियों की स्थिति के आधार पर डीपीसी की तैयारी कर रहे हैं।
    न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी पदोन्नतियां
    प्रदेश में पदोन्नति का मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है। वर्ष 2002 के पदोन्नति नियमों को जबलपुर हाई कोर्ट ने 2016 में निरस्त कर दिया था। इसके बाद इस मुद्दे पर लंबी सुनवाई चली और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। प्रकरण अभी भी वहां लंबित है। हालांकि, वर्ष 2025 के नए नियमों पर हाई कोर्ट की ओर से रोक नहीं लगाए जाने के आधार पर सरकार ने पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की है। ये पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन दी जा रही हैं। ऐसे में प्रक्रिया आगे बढऩे के बावजूद इसका कानूनी पहलू महत्वपूर्ण बना हुआ है।
    चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी राहत
    पदोन्नति प्रक्रिया में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी राहत देने की व्यवस्था की गई है। सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण जिन कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं मिल पा रही थी, उनके लिए नियमों में संशोधन किया गया है। इसके बाद पदावनत कर्मचारियों को भी पात्रता के अनुसार पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इससे लंबे समय से पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
    पुलिस में ढाई हजार पदोन्नतियों की तैयारी
    पदोन्नति का अगला दौर पुलिस विभाग के लिए भी अहम होगा। विभाग में लगभग ढाई हजार कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने की संभावना है। इनमें 108 इंस्पेक्टरों को उप पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नत किया जाना है। इसके अलावा सरकार ने विभागों को आगामी वर्ष के लिए भी डीपीसी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि रिक्त पदों और पात्रता के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ सके।
    पीडब्ल्यूडी में आदेश का इंतजार
    दूसरी ओर, लोक निर्माण विभाग में मुख्य अभियंता के पदों पर पदोन्नति का मामला अभी आदेशों के इंतजार में है। अधीक्षण यंत्रियों को मुख्य अभियंता के पद पर पदोन्नत करने के लिए 7 अक्टूबर को डीपीसी हो चुकी है, लेकिन अब तक पदोन्नति आदेश जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की नजर आदेश जारी होने पर टिकी है।

Related Articles