पंचायत चुनाव: अप्रैल-मई में मतदान की तैयारी

पंचायत चुनाव
  • जनवरी की मतदाता सूची बनेगी आधार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज होने के संकेत मिलने लगे हैं। प्रदेश में अगले साल अप्रैल-मई 2027 में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बालाघाट जिले के ग्राम गर्रा में आयोजित सरपंच सम्मेलन में चुनाव की संभावित समय-सीमा बताई है। इसके लिए एक जनवरी 2027 की स्थिति के आधार पर मतदाता सूची तैयार करने की बात कही गई है। हालांकि, चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है।
पंचायत चुनाव की तैयारी के बीच सरकार ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली और आर्थिक अधिकारों में बदलाव की दिशा में भी काम कर रही है। नवंबर तक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसके तहत ग्राम सभा के अधिकारों को ग्राम पंचायत समितियों को सौंपने और पंचायतों को नियमानुसार टैक्स लगाकर अपनी आय बढ़ाने का अधिकार देने की योजना है। सरकार की कोशिश पंचायतों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रखने के बजाय स्थानीय विकास के लिए अधिक सक्षम बनाने की है।
चुनाव से पहले मतदाता सूची पर फोकस
प्रदेश में पिछला त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव जून-जुलाई 2022 में हुआ था। अब अगले चुनाव के लिए अप्रैल-मई 2027 की संभावित समय-सीमा सामने आने से प्रशासनिक तैयारियों का महत्व बढ़ गया है। मंत्री के मुताबिक, मतदाता सूची एक जनवरी 2027 की स्थिति के आधार पर तैयार की जाएगी। हालांकि, मतदान की तारीख, चुनाव कार्यक्रम और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित चुनाव प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में फिलहाल अप्रैल-मई को संभावित समय-सीमा के तौर पर देखा जाना चाहिए।
ग्राम सभा के अधिकार पंचायत समितियों को देने की तैयारी
पंचायत व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों के तहत ग्राम सभा के अधिकार ग्राम पंचायत समितियों को देने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे विकास कार्यों से जुड़े फैसलों में तेजी आएगी और निर्णय प्रक्रिया सरल होगी। इस व्यवस्था का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अधिकारों का हस्तांतरण किस रूप में होता है, समितियों की जिम्मेदारियां कैसे तय की जाती हैं और ग्राम सभा की भूमिका को किस तरह सुनिश्चित किया जाता है। स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारों के साथ जवाबदेही तय करना भी अहम होगा।
टैक्स लगाकर आय बढ़ा सकेंगी पंचायतें
सरकार पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें नगरपालिका की तर्ज पर नियमानुसार टैक्स लगाने का अधिकार देने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके जरिए पंचायतें स्थानीय स्तर पर अपनी आय बढ़ा सकेंगी और जरूरी सेवाओं के संचालन में इस राशि का उपयोग कर सकेंगी। मंत्री ने नल-जल जैसी योजनाओं के बेहतर संचालन के संदर्भ में पंचायतों की आय बढ़ाने की जरूरत बताई। फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि पंचायतों को किन मदों में कर लगाने की अनुमति मिलेगी, दरें कैसे निर्धारित होंगी और वसूली की प्रक्रिया क्या होगी। यदि पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार राजस्व जुटाने के अधिक अधिकार मिलते हैं, तो पेयजल, स्वच्छता और सामुदायिक सुविधाओं के रखरखाव में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए पारदर्शी व्यवस्था और ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ को संतुलित करना भी जरूरी होगा।
पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
बालाघाट में आयोजित सरपंच सम्मेलन में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि पंचायत विभाग का कार्यभार संभालने के बाद से उनका जोर जमीनी स्तर पर विकास को गति देने पर रहा है। उन्होंने ई-लाइब्रेरी, सामुदायिक भवन और ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण का उल्लेख करते हुए सरपंचों से ग्राम सभा और पंचायत बैठकों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। सरकार की प्रस्तावित पहल के दो प्रमुख पहलू हैं-एक ओर पंचायत चुनाव की तैयारी और दूसरी ओर स्थानीय निकायों को अधिक अधिकार तथा आय के साधन उपलब्ध कराना। चुनाव से पहले इन बदलावों को लागू करने की योजना पंचायतों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कब होती है और पंचायतों के अधिकारों व वित्तीय संसाधनों से जुड़े प्रस्ताव किस रूप में लागू किए जाते हैं।

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