
- सीपीसीटी से छूट: 45 वर्ष की उम्र वालों को राहत
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति देने के लिए राज्य शासन ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पदोन्नति की तारीख तक 45 वर्ष की आयु पूरी कर चुके चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (सीपीसीटी) के स्कोर कार्ड से छूट दी जाएगी। हालांकि इन कर्मचारियों के लिए कंप्यूटर दक्षता अनिवार्य रहेगी। यह छूट केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में लागू होगी। सीधी भर्ती या नियुक्ति के अन्य माध्यमों में निर्धारित सीपीसीटी और कंप्यूटर डिप्लोमा की अर्हता अनिवार्य रहेगी। राज्य शासन ने यह निर्णय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति के उचित और न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराने और पदोन्नति की प्रक्रिया में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए लिया है। इस संबंध में शासन के समस्त विभागों, संभागायुक्तों, विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं। प्रदेश में मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के तहत पदोन्नति की कार्रवाई चल रही है।
सीधी भर्ती में छूट नहीं
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 45 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कर्मचारियों को सीपीसीटी स्कोर कार्ड से मिलने वाली छूट केवल विभागीय पदोन्नति के लिए है। सीधी भर्ती या नियुक्ति के अन्य माध्यमों में निर्धारित सीपीसीटी और कंप्यूटर डिप्लोमा संबंधी योग्यता अनिवार्य रहेगी। सामान्य नियम के तहत सीपीसीटी स्कोर कार्ड की वैधता सात साल निर्धारित है।
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में कई जिलों से आए पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। उन्होंने अधिकारियों को जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के निर्देश दिए। जिन मामलों में विभागीय कार्रवाई की आवश्यकता है, उन्हें शीघ्र समाधान के लिए विभागों को भेजा गया। इस दौरान भाजपा की प्रदेश मंत्री अर्चना सिंह भी उपस्थित रहीं। मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्राप्त जनसमस्याओं का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और उनके समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर प्रयास किए जाएंगे।
दो साल की परीक्षण अवधि में पूरी करना होगी योग्यता
निर्देशों के अनुसार सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता रखने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दो वर्ष की परीक्षण अवधि पर पदोन्नति दी जा सकेगी। इस अवधि में उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित सीपीसीटी उत्तीर्ण करना होगी और निर्धारित मान्यता प्राप्त संस्था से एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा या प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा। पदोन्नति के बाद दो वर्ष की परीक्षण अवधि में निर्धारित योग्यता हासिल नहीं करने पर कर्मचारी की परीक्षण अवधि अधिकतम तीन वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी। इस तरह परीक्षण अवधि कुल पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी। यदि कर्मचारी पांच वर्ष में भी जरूरी योग्यता हासिल नहीं कर पाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस भेजना होगा।
कंप्यूटर से संबंधित डिग्रियां भी होंगी मान्य
निर्धारित कंप्यूटर डिप्लोमा के अलावा बीई (कंप्यूटर साइंस/आईटी), एमसीए, बीसीए, एमएससी (आईटी/कंप्यूटर साइंस), बीएससी (आईटी कंप्यूटर साइंस), एमटेक और एमई जैसी योग्यताएं भी मान्य होंगी। कंप्यूटर साइंस, कंप्यूटर एप्लीकेशन और सूचना प्रौद्योगिकी में एआईसीटीई से अनुमोदित पॉलीटेक्निक डिप्लोमा भी स्वीकार किया जाएगा। बीएससी या बीकॉम जैसी सामान्य डिग्री में केवल एक विषय में कंप्यूटर पढऩे को पर्याप्त योग्यता नहीं माना जाएगा। मप्र राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा का कहना है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में आ रही परेशानी को देखते हुए सीएम डॉ. यादव के निर्देश पर 45 साल की उम्र पूरी कर चुके चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सीपीसीटी से छूट दी है इससे 10 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
