
- बूथ से सरकार की योजनाओं तक सीधा फोकस
बिच्छू डॉट कॉम/भोपाल (डीएनएन)। मध्यप्रदेश भाजपा में संगठन को नए सिरे से कसने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश के नए प्रभारी बिप्लब कुमार देव के भोपाल दौरे में हुई बैठकों से संकेत मिले हैं कि पार्टी आने वाले तीन महीनों में संगठन के स्तर पर कई अहम बदलाव कर सकती है। सबसे बड़ा बदलाव करीब 20 सदस्यीय कोर ग्रुप के विस्तार के रूप में सामने आ सकता है। प्रदेश प्रभारी ने मौजूदा कोर ग्रुप को फिलहाल छोटा बताते हुए आने वाले समय में इसका विस्तार करने के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही पार्टी के भीतर गुटबाजी, आपसी खींचतान और सार्वजनिक बयानबाजी पर भी सख्ती का संदेश दिया गया है। देव ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि मतभेद होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इन्हें सार्वजनिक मंच तक नहीं पहुंचना चाहिए। विवाद हो तो संगठन के भीतर बातचीत से उसका समाधान निकाला जाए। नई रणनीति का दूसरा बड़ा हिस्सा बूथ और मंडल स्तर पर संगठन की पकड़ मजबूत करना है। पार्टी अब कार्यकर्ताओं को केवल राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय सरकार की योजनाओं और उनके लाभ को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने में भी सक्रिय भूमिका देने की तैयारी में है।
भाजपा के मौजूदा कोर ग्रुप में करीब 20 सदस्य हैं। प्रदेश प्रभारी के संकेतों के बाद अब इसे विस्तारित किए जाने की चर्चा तेज है। हालांकि पार्टी ने अभी न तो नए सदस्यों की संख्या बताई है और न ही संभावित नामों की आधिकारिक घोषणा की है। ऐसे में संगठन के भीतर इस बात पर नजर है कि विस्तार का आधार क्या होगा। क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठन में भूमिका, सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा अलग-अलग राजनीतिक क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले नेताओं को इसमें जगह मिलने की संभावनाओं पर चर्चा है। लेकिन संभावित नामों को अभी अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है। प्रदेश प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा कोर ग्रुप को अंतिम स्वरूप नहीं माना जा रहा। इसका विस्तार आगे किया जाएगा। इससे संकेत है कि संगठन के भीतर निर्णय प्रक्रिया के इस महत्वपूर्ण मंच में कुछ नए नेताओं को जोड़ा जा सकता है। बैठक में वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी। वे वर्तमान कोर ग्रुप के सदस्यों में शामिल हैं। हालांकि उनकी अनुपस्थिति को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को सीधे तौर पर किसी संगठनात्मक बदलाव से जोडऩा फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन कोर ग्रुप के विस्तार की चर्चा के बीच उनका नाम राजनीतिक चर्चाओं में जरूर बना हुआ है।
गुटबाजी पर लगाम, मतभेद कमरे में सुलझेंगे
प्रदेश भाजपा की नई संगठनात्मक लाइन में सबसे स्पष्ट संदेश गुटबाजी को लेकर है। नेताओं को कहा गया है कि संगठन के भीतर किसी तरह की खींचतान या मतभेद हो तो उसका समाधान बातचीत से किया जाए। प्रदेश प्रभारी ने नेताओं को संकेत दिया कि सार्वजनिक मंच पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी से संगठन की छवि प्रभावित होती है। मतभेद रह सकते हैं, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर ही सुलझाने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इसका असर उन नेताओं पर पड़ सकता है जो अपनी ही पार्टी की व्यवस्था या नेताओं को लेकर सार्वजनिक बयान देते रहे हैं। संगठन अब ऐसी बयानबाजी के बजाय विपक्ष के आरोपों का एकजुट होकर जवाब देने पर जोर देने की तैयारी में है। बैठक में कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह संदेश भी दिया गया कि पार्टी और संगठन से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं है। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठन को रखने तथा कार्यकर्ताओं को सम्मान देने पर जोर दिया गया। प्रदेश प्रभारी और संगठन के वरिष्ठ नेताओं की ओर से यह संकेत दिया गया कि पद मिलना और हटना संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। किसी जिम्मेदारी में बदलाव को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य संगठन में पद और दायित्व को लेकर होने वाली खींचतान को कम करना माना जा रहा है।
नेताओं के चेहरे नहीं, योजनाओं का प्रचार
भाजपा के प्रचार अभियान के तरीके में भी बदलाव की तैयारी है। प्रदेश प्रभारी ने नेताओं की बड़ी तस्वीरों वाले पोस्टर और बैनर की जगह केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा उनके लाभ को प्राथमिकता देने की बात कही है। यानी प्रचार में नेता का चेहरा कम और सरकार का काम ज्यादा दिखाई देने की रणनीति अपनाई जा सकती है। कार्यकर्ताओं को यह भी जिम्मेदारी देने की बात कही गई है कि वे देखें कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। इससे संगठन की भूमिका केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर सरकार और जनता के बीच संपर्क की कड़ी के रूप में भी बढ़ सकती है। संगठनात्मक अनुशासन के साथ नेताओं के स्वागत के तौर-तरीकों पर भी सख्त संदेश दिया गया है। भविष्य में नेताओं का स्वागत जेसीबी, क्रेन या भारी-भरकम मालाओं के जरिए नहीं करने की सलाह दी गई है। हाल में इंदौर में नितिन नवीन के स्वागत के दौरान क्रेन से बड़ी माला पहनाए जाने का मामला चर्चा में आया था। इसके बाद पार्टी के भीतर सादगीपूर्ण स्वागत का संदेश दिया गया। प्रदेश प्रभारी ने नेताओं को सलाह दी कि दिखावे के बजाय संगठन और सरकार की योजनाओं को प्रचार का केंद्र बनाया जाए। कोर ग्रुप की बैठक में सरकार और संगठन के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दे भी सामने आए। मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की ओर से प्रशासनिक स्तर पर कामकाज तथा अधिकारियों के साथ आने वाली व्यवहारिक दिक्कतों को उठाए जाने की जानकारी सामने आई। सरकार से जुड़े विभागों में सामने आने वाली घटनाओं और उनकी निगरानी को लेकर भी चर्चा हुई। इससे संकेत मिलता है कि संगठन सरकार के कामकाज से जुड़े फीडबैक को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से ऊपर तक पहुंचाने की भूमिका में आ सकता है।
बूथ बनेगा संगठन का अगला केंद्र
आने वाले समय में भाजपा का फोकस बूथ और मंडल स्तर पर सक्रियता बढ़ाने पर रहेगा। संगठन ने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद मजबूत करने और लगातार गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी की है। इस रणनीति के दो हिस्से होंगे-पहला, बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय और अनुशासित करना; दूसरा, सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को इसी नेटवर्क के जरिए जनता तक पहुंचाना। यानी आने वाले समय में पार्टी के लिए बूथ केवल चुनावी प्रबंधन की इकाई नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की योजनाओं की जानकारी और फीडबैक का भी प्रमुख माध्यम बन सकता है। प्रदेश प्रभारी के दौरे के बाद पार्टी ने अगले तीन महीनों के लिए विशेष रणनीति तैयार करने के संकेत दिए हैं। जिला और संभाग स्तर की बैठकों में संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और सरकार की योजनाओं के प्रचार की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद कोर ग्रुप के विस्तार समेत संगठन के दूसरे स्तरों पर भी बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोर ग्रुप के विस्तार में किन नेताओं को जगह मिलती है और किन क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया जाता है। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संगठन और सरकार के बीच समन्वय की नई व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर उतरती है।
संगठन में बदलाव की तैयारी
प्रदेश प्रभारी के दौरे के बाद भाजपा ने अगले तीन महीनों के लिए संगठनात्मक स्तर पर एक विशेष रोडमैप तैयार करने के संकेत दिए हैं। इसका मकसद केवल संगठन की बैठकों और गतिविधियों को बढ़ाना नहीं, बल्कि पार्टी के अलग-अलग स्तरों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। बैठकों में यह संदेश दिया गया कि संगठन में किसी भी स्तर पर मतभेद या गुटबाजी की स्थिति बनती है तो उसे सार्वजनिक मंच तक पहुंचने से पहले बातचीत और संवाद के जरिए सुलझाया जाए। जिला और संभाग स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के निर्देश इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। प्रदेश प्रभारी का जोर इस बात पर भी रहा कि संगठन में जिम्मेदारी मिलना या हटना सामान्य प्रक्रिया है। किसी पद या दायित्व में बदलाव को लेकर कार्यकर्ता संगठन से दूरी न बनाएं। यानी पद से ज्यादा संगठन और कार्यकर्ता की भूमिका को महत्व देने का संदेश दिया गया है। यह संकेत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा के भीतर अलग-अलग स्तरों पर नेताओं के बीच मतभेद और संगठनात्मक खींचतान की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में नई प्रदेश टीम का शुरुआती फोकस संगठन को एकजुट और अनुशासित रखने पर दिखाई दे रहा है। बैठकों में दिया गया एक प्रमुख संदेश यह रहा कि मतभेद लोकतांत्रिक संगठन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सार्वजनिक मंच पर नहीं लाया जाना चाहिए। प्रदेश प्रभारी ने साफ कहा कि जहां मतभेद हैं, वहां संवाद होना चाहिए। आपसी बातचीत से समस्या का समाधान निकाला जाए। सार्वजनिक बयानबाजी या संगठन के भीतर के विवादों को बाहर ले जाने की प्रवृत्ति पर सख्ती बरतने के संकेत दिए गए हैं। इसका सीधा असर उन नेताओं पर पड़ सकता है जो समय-समय पर अपनी ही पार्टी के नेताओं या संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक बयान देते रहे हैं। पार्टी की रणनीति अब यह दिखाई दे रही है कि आंतरिक असहमति को संगठनात्मक मंच पर जगह मिले, लेकिन सार्वजनिक राजनीति में पार्टी की एकजुट छवि बनी रहे।
अगला फोकस बूथ और मंडल
आने वाले समय में भाजपा का सीधा फोकस बूथ और मंडल स्तर पर संगठन को सक्रिय करने पर रहने वाला है। बैठकों में लगातार यह संदेश दिया गया कि प्रदेश स्तर की राजनीतिक रणनीति तभी प्रभावी होगी जब उसका असर बूथ तक दिखाई दे। इसके लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने और नियमित गतिविधियां संचालित करने की तैयारी है। संगठन की योजना सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी को भी इसी नेटवर्क के जरिए आम लोगों तक पहुंचाने की है। इसका अर्थ यह है कि कार्यकर्ता केवल पार्टी कार्यक्रमों में भाग लेने वाले कैडर के रूप में नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं और उनके लाभार्थियों के बीच संपर्क की कड़ी के रूप में भी सक्रिय होंगे। भाजपा के संगठनात्मक संदेश में प्रचार की भाषा बदलने का संकेत भी साफ दिखाई देता है। नेताओं के पोस्टर, बड़ी मालाएं, जेसीबी-क्रेन से स्वागत और व्यक्तिगत प्रचार की जगह सरकारी योजनाओं, उपलब्धियों और लाभार्थियों को केंद्र में लाने की कोशिश होगी। इसका असर पार्टी के प्रचार अभियानों पर दिखाई दे सकता है। जिला और संभाग स्तर पर होने वाली बैठकों में यह तय किया जा सकता है कि स्थानीय स्तर पर सरकार की योजनाओं का प्रचार किस तरह किया जाए और कार्यकर्ता यह कैसे सुनिश्चित करें कि योजना का लाभ वास्तविक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। यानी पार्टी संगठन को राजनीतिक प्रचार मशीन के साथ-साथ सरकार की योजनाओं की जमीन पर पहुंच का नेटवर्क बनाने की दिशा में भी ले जाने की तैयारी दिखाई दे रही है।
