भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कमी दूर करने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में स्वीकृत 2003 पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 240 फॉरेंसिक अधिकारी कार्यरत हैं। ऐसे में गंभीर अपराधों की जांच के दौरान घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की अनिवार्य प्रक्रिया को पूरा करना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। इस कमी को दूर करने के लिए अब गुजरात के गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी से अनुबंध के आधार पर विशेषज्ञों की सेवाएं लेने पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में हुई बैठक में केंद्रीय गृह सचिव ने मध्य प्रदेश के अधिकारियों को इस दिशा में पहल करने का सुझाव दिया। इसके बाद पुलिस विभाग ने विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जरूरी तकनीकी संसाधन और मानव बल उपलब्ध कराना है।
2003 पदों पर सिर्फ 240 अधिकारी
प्रदेश में फॉरेंसिक अधिकारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। उपलब्ध आंकडह्यॉरेंसिक टीम की उपलब्धता सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है। नए आपराधिक कानूनों के तहत सात साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में घटनास्थल पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए प्रशिक्षित अधिकारियों, आधुनिक उपकरणों और समय पर घटनास्थल तक पहुंचने वाली टीमों की जरूरत होती है। विशेषज्ञों की पर्याप्त संख्या नहीं होने पर जांच प्रक्रिया प्रभावित होने और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में देरी की आशंका बनी रहती है। इसी वजह से पुलिस विभाग अब वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अनुबंध आधारित भर्ती की संभावनाएं तलाश रहा है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ अपराध से जुड़े भौतिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच करते हैं। इससे पुलिस को घटनाक्रम समझने, संदिग्धों की पहचान करने और अदालत में साक्ष्यों के आधार पर मामला प्रस्तुत करने में मदद मिलती है।
गांधीनगर की यूनिवर्सिटी से मिल सकती है मदद
फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए गुजरात के गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी से विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का सुझाव दिया गया है। केंद्रीय गृह सचिव की बैठक में सामने आए इस प्रस्ताव के बाद प्रदेश पुलिस ने इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की है। अनुबंध पर विशेषज्ञों की नियुक्ति होने से उपलब्ध मानव संसाधन की कमी को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिल सकती है। इससे गंभीर अपराधों की जांच के लिए घटनास्थल पर वैज्ञानिक टीम भेजने और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को मजबूत करने की संभावना है। हालांकि, नियुक्तियों की संख्या, समय सीमा और तैनाती की व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
10/10/2026
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