
- राजस्व कार्यों में भ्रष्टाचार पर सीएस का अल्टीमेटम
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजस्व के कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में जिला स्तर पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। विभिन्न जिलों में रिश्वत के आरोपी पटवारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। यह कार्रवाई लोकायुक्त में दर्ज शिकायत, जांच में सामने आए तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। वहीं, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को स्वामित्व योजना में काम कराने के लिए अल्टीमेटम दिया है। सीएस ने कहा कि सात दिन में काम कराओ, नहीं तो भोपाल बुलाया जाएगा। गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बर्णवाल ने कलेक्टरों से कहा कि सात दिन में स्वामित्व योजना में काम कराओ। उन्होंने कहा कि यदि काम नहीं करा पाते है तो भोपाल बुला लिया जाएगा। उन्होंने कलेक्टरों से कहा है कि काम दिखना चाहिए। इधर, पटवारियों के स्वामित्व योजना का काम नहीं करने के बीच नामांतरण, बंटवारे और अन्य राजस्व कार्यों में रिश्वतखोरी के मामलों में भी सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है।
राजस्व आयुक्त कार्यालय में बैठक रही बेनतीजा
स्वामित्व योजना में काम बंद करने और बर्खास्तगी-निलंबन के विरोध में आंदोलन कर रहे पटवारियों की गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में बैठक हुई थी। आयुक्त भू-संसाधन एवं प्रबंधन की मौजूदगी में हुई इस बातचीत में पटवारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को पटवारियों से बातचीत के लिए अधिकृत किया गया। पटवारी प्रतिनिधिमंडल वल्लभ भवन पहुंचा, लेकिन डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते आगे की बैठक टल गई और फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है।
एग्जीक्यूटर की भूमिका का विरोध कर रहे पटवारी
पटवारी स्वामित्व योजना में निष्पादक यानी एग्जीक्यूटर की भूमिका दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह जिम्मेदारी उनके मूल कार्य और अधिकार क्षेत्र से अलग है। इसी के विरोध में प्रदेशभर में पटवारी प्रदर्शन कर रहे हैं और राजस्व संबंधी काम प्रभावित हैं। दूसरी ओर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि पटवारी का काम पटवारी ही करेगा और कलेक्टरों को सात दिन में स्वामित्व योजना का काम शुरू कराने के लिए जरूरी कार्रवाई करनी होगी।
पटवारियों पर मुकदमों की मंजूरी
सतना, जबलपुर, नर्मदापुरम, सीहोर और भोपाल के पांच पटवारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति जारी की गई है। इनमें लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई से जुड़े मामले भी शामिल हैं। सतना के तत्कालीन पटवारी संतोष सतनामी पर नामांतरण और बंटवारे के लिए 15 हजार रुपये मांगने और पांच हजार रुपये लेते पकड़े जाने का आरोप है। जबलपुर के पटवारी सनी द्विवेदी पर चार बीघा भूमि के नामांतरण के लिए 15 हजार रुपये मांगने और 13 हजार रुपये लेते पकड़े जाने का मामला है। सीहोर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर पर भूमि नामांतरण के लिए आठ हजार रुपये मांगने का आरोप है। भोपाल के कोलार क्षेत्र के पटवारी मंगलेश खंडेलवाल पर मकान के नामांतरण और लीज रिन्यू के एवज में आठ हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। नर्मदापुरम के पटवारी देवेंद्र सहारिया के खिलाफ भी अभियोजन स्वीकृति दी गई है।
योजना के खिलाफ नहीं, भूमिका स्पष्ट करने की मांग
वहीं, पटवारियों के सघ का कहना है कि उनकी आपत्ति स्वामित्य योजना के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक योजना से ग्रामीणों को संपत्ति का रिकॉर्ड मिल रहा है और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का रास्ता भी आसान हो रहा है। उनकी मांग है कि दस्तावेज का निष्पादन कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, एसडीओ/ एसडीएम या शासन द्वारा विधि-सम्मत रूप से अधिकृत सक्षम अधिकारी से कराया जाए। साथ ही पटवारियों की मैदानी और अभिलेखीय भूमिका स्पष्ट रखते हुए उन्हें लिखित मार्गदर्शन और कानूनी संरक्षण दिया जाए। उनका कहना है कि जिस काम की वैधानिक अधिकारिता स्पष्ट नहीं है, उसमें व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही लेकर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा।
