इस बार 32,500 टन मिलेट्स खरीदेगी सरकार

मिलेट्स
  • कोदो-कुटकी समेत मिलेट्स की बिक्री के लिए आज से शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन
  • पिछली बार खरीदी में देरी से किसान मंडी में बेच गए, 3 हजार मीट्रिक टन ही खरीद पाई थी सरकार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  पिछले साल मिलेट्स की खरीदी देर से शुरू करने का खामियाजा सरकार को कम खरीदी के रूप में भुगतना पड़ा था। खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने तक बड़ी संख्या में किसान कोदो-कुटकी मंडियों और फुटकर व्यापारियों को बेच चुके थे। इस अनुभव से सबक लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इस बार खरीदी की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी है। सरकार ने कोदो-कुटकी समेत मिलेट्स की खरीदी का लक्ष्य पिछले साल के मुकाबले 10 गुना से ज्यादा बढ़ाकर 32 हजार 500 मीट्रिक टन कर दिया है। पिछले साल करीब 3 हजार मीट्रिक टन ही खरीदी हो सकी थी। मिलेट्स की खरीदी श्रीअन्न फेडरेशन के माध्यम से की जाएगी। किसानों के रजिस्ट्रेशन 6 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होंगे। फेडरेशन दिसंबर में खरीदी शुरू करेगा।
दरअसल, प्रदेश में पहली बार वर्ष 2025 में कोदो और कुटकी की सरकारी खरीदी शुरू की गई थी। इसके लिए निर्णय अक्टूबर में लिया गया था। खरीदी प्रक्रिया देर से शुरू होने के कारण अपेक्षाकृत कम किसानों ने पंजीयन कराया। इस बीच बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज मंडियों और निजी व्यापारियों को बेच चुके थे। नतीजा यह रहा कि सरकार करीब 3 हजार मीट्रिक टन ही खरीद सकी। इस बार सरकार ने इसी स्थिति से बचने के लिए खरीदी की प्रक्रिया पहले शुरू कर दी है। हाल ही में कृषि सचिव निशांत वरवड़े ने श्रीअन्न फेडरेशन के अधिकारियों के साथ बैठक कर उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए।
किसानों को मिल रहा बोनस
सरकार ने कुटकी का समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल और कोदो का 2500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके अलावा किसानों को खरीदी पर 1000 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाता है। किसानों से अपील की गई है कि वे निर्धारित अवधि में पंजीयन करा लें, ताकि उनकी उपज सरकारी खरीदी में शामिल हो सके। श्रीअन्न फेडरेशन के सीईओ बलराम विश्वकर्मा के अनुसार इस बार अधिक से अधिक श्रीअन्न उत्पादक किसानों से उपज खरीदने का प्रयास किया जा रहा है। मिलेट्स में ज्वार, बाजरा, रागी, लघु बाजरा, प्रोसो बाजरा, कोदो और कुटकी समेत 16 प्रमुख किस्में शामिल हैं। इनमें कैल्शियम, आयरन और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। सरकार इन फसलों के उत्पादन के साथ इनके प्रसंस्करण और बाजार विस्तार पर भी जोर दे रही है।
खरीदी बढ़ेगी तो प्रोसेसिंग को भी मिलेगा कच्चा माल
सरकार का लक्ष्य केवल कोदो-कुटकी की खरीदी तक सीमित नहीं है। श्रीअन्न फेडरेशन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के जरिए कोदो-कुटकी की फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा दे रहा है। इससे किसानों को सिर्फ कच्ची उपज बेचने के बजाय प्रसंस्कृत उत्पादों से भी आय बढ़ाने का अवसर मिल सकेगा। फेडरेशन ने नर्मदा मिलेट्स नाम से ब्रांड विकसित किया है। इसके तहत फिलहाल कोदो-कुटकी से इडली-डोसा मिश्रण, उपमा, खिचड़ी और बिस्किट समेत पांच तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। अगले साल बड़े स्तर पर प्रोसेसिंग और उत्पाद निर्माण की तैयारी है। इसी वजह से फेडरेशन को अधिक मात्रा में कोदो-कुटकी की जरूरत होगी और खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया गया है।
उत्पादन में देश में सातवें नंबर पर मप्र
देश में मिलेट्स उत्पादन में मध्य प्रदेश का सातवां स्थान बताया गया है। कुल उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 28.06 प्रतिशत है। इसके बाद कर्नाटक 14.02, महाराष्ट्र 13.09, उत्तर प्रदेश 12.70, हरियाणा 7.06, गुजरात 6 और मध्य प्रदेश 5.07 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। प्रदेश में कोदो-कुटकी का प्रमुख उत्पादन जबलपुर संभाग के मंडला, डिंडोरी और जबलपुर के कुंडम क्षेत्र में होता है। इस क्षेत्र को प्रदेश में मिलेट्स बेल्ट के रूप में जाना जाता है।

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