पढ़ाई के तनाव में 10 साल में 1.15 लाख छात्रों ने गंवाई जान

देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का दबाव और सामाजिक परिस्थितियां छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स के हालिया सर्वे में एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, 9 फीसदी छात्रों के मन में अक्सर आत्महत्या के विचार आते हैं, जबकि 34 फीसदी छात्र अपने ही कैंपस में खुद को बाहरी महसूस करते हैं। दरअसल, मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एनटीएफ  के प्रमुख जस्टिस एस रवींद्र भट ने देशभर के 2.43 लाख से अधिक छात्रों पर यह सर्वे किया। टास्क फोर्स अपनी अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में सौंपेगी। सर्वे में दावा किया गया है कि 15 फीसदी छात्रों ने स्वीकार किया कि पिछले 6 महीनों में वे कई हफ्तों तक भारी तनाव और चिंता से जूझे। सर्वे में शामिल कुल छात्रों में 67 फीसदी छात्र एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणी से थे। यहां सकारात्मक पहलू यह है कि 56 फीसदी छात्रों को अब भी भरोसा है कि प्रशासन गंभीर मुद्दों को संभालेगा। 2011 से 2022 के बीच हायर एजुकेशन में कुल दाखिले 2.92 करोड़ से बढक़र 4.33 करोड़ हुए, लेकिन इस दौरान आत्महत्या की दर कहीं अधिक तेज रफ्तार से बढ़ी।

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