
विश्व हृदय दिवस: एमसीसीडी की नवीनतम रिपोर्ट का खुलासा…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पूरी दुनिया आज विश्व हृदय दिवस मना रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व हृदय महासंघ द्वारा इस बार की थीम यूज हार्ट फॉर एक्शन और डांट मिस द बीट तय की गई है, जिसका सीधा संदेश है कि अब सिर्फ हृदय रोग के प्रति सचेत रहने का समय बीत चुका है, अब तुरंत ठोस कदम उठाने और त्वरित इलाज का सिस्टम बनाने की जरूरत है। लेकिन मध्य प्रदेश में जमीनी हकीकत इस थीम के ठीक उलट नजर आ रही है। मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ (एमसीसीडी) और राज्य स्वास्थ्य विभाग के ताजा रुझानों के मुताबिक, प्रदेश में हर घंटे औसतन 4 से अधिक लोग हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों और कार्डियक अरेस्ट की वजह से अपनी जान गंवा रहे हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
एमसीसीडी की रिपोर्ट हाल ही में 16 जुलाई को जारी की गई है। जिसमें वर्ष 2024 का डाटा है। नई रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में दर्ज कुल मौतों में से 35.2 प्रतिशत मौतों का कारण केवल हृदय रोग और वैस्कुलर सिस्टम की बीमारियां हैं। साल 2019 में जहां कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौतों का आंकड़ा करीब 28 प्रतिशत था, वहीं 2024-25 तक इसमें 42 फीसदी से अधिक की खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चिंताजनक बात यह है कि साइलेंट अटैक और पोस्ट-कोविड वैस्कुलर समस्याओं के कारण 25 से 45 वर्ष की कार्यशील आबादी सबसे ज्यादा शिकार हो रही है।
गोल्डन ऑवर में भी 3.5 घंटे की देरी
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, अटैक आने के शुरुआती 60 मिनट को गोल्डन आवर कहा जाता है। यदि इस दौरान नसों का ब्लॉक खोल दिया जाए या थ्रोम्बोलाइटिस इंजेक्शन दे दिया जाए तो मरीज की जान बच सकती है। लेकिन मप्र के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से राजधानी तक पहुंचने में औसतन 3.5 से 5 घंटे का समय लग जाता है। तब तक दिल की मांसपेशियां स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। रिपोर्ट ने यह भी खुलासा किया है कि मप्र का बुनियादी स्वास्थ्य ढांचा बहुत कमजोर है। इतने बड़े स्वास्थ्य संकट के बावजूद इलाज का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह चरमराया हुआ है। प्रदेश के 55 में से 51 जिला अस्पतालों में आज भी इमरजेंसी एजियोप्लास्टी के लिए प्राथमिक कैथलैब की सुविधा उपलब्ध नहीं है। राज्य में मौजूद कुल 120 से अधिक पंजीकृत कार्डियोलॉजिस्ट में से 82 प्रतिशत से अधिक डॉक्टर सिर्फ भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में केंद्रित हैं। सीने में तेज दर्द के साथ पहुंचने वाले मरीजों को जिला अस्पतालों में केवल प्राथमिक प्राथमिक दवाएं देकर तुरंत भोपाल के हमीदिया/एम्स या इंदौर के एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
आयुष्मान योजना भी पड़ रही कम
हालांकि आयुष्मान योजना के तहत दिल की सर्जरी और स्टेंटिंग का प्रावधान है, लेकिन प्रदेश के 450 से अधिक पंजीकृत निजी अस्पतालों में से केवल 32 अस्पतालों के पास ही एक्टिव कार्डियक केयर और कैथलैब का सेटअप है। योजना के बजट और पैकेज दरों को लेकर निजी अस्पतालों की अरुचि के कारण गरीब मरीजों को कार्डियक इमरजेंसी में वेंटिलेटर या बेड के लिए भटकना पड़ता है।
