- संघ के 100 साल बाद बदलेगा संगठन का स्वरूप, इंदौर में तय होगा आगे का ढांचा
- गौरव चौहान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने के बाद संगठन के संचालन ढांचे में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इंदौर में 3 से 5 अक्टूबर तक होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में संघ के मौजूदा संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा के साथ प्रस्तावित नई व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित देश के सभी 46 प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ यह भी देखा जाएगा कि शाखा विस्तार, सामाजिक गतिविधियों और संगठन के अभियानों को आगे किस ढांचे के जरिए संचालित किया जाए। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित बदलाव खास तौर पर महत्वपूर्ण होगा। अभी संघ की दृष्टि से प्रदेश मध्य भारत, मालवा और महाकौशल तीन प्रांतों में विभाजित है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश को एकीकृत संरचना में रखते हुए भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा सात संभागों में बांटने की योजना बताई जा रही है। प्रत्येक संभाग की जिम्मेदारी संभाग प्रचारक को देने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही मौजूदा प्रांतीय कार्यकारिणी की जगह राज्य टोली के जरिए संचालन की व्यवस्था पर भी चर्चा हो सकती है। यदि यह ढांचा लागू होता है तो मध्य प्रदेश में संघ की जिम्मेदारियों और रिपोर्टिंग सिस्टम का स्वरूप बदल जाएगा।
संघ के संगठनात्मक ढांचे में प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा असर क्षेत्रीय जिम्मेदारियों पर पड़ सकता है। मौजूदा व्यवस्था में प्रांत प्रचारक स्तर पर संगठन का संचालन होता है। प्रस्तावित मॉडल में संभाग प्रचारक व्यवस्था लाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था को अगले वर्ष मार्च से लागू करने की तैयारी है। हालांकि इसका अंतिम स्वरूप और जिम्मेदारियों का बंटवारा इंदौर की बैठक में होने वाले विमर्श के बाद स्पष्ट होगा। इस बदलाव के पीछे संगठन को छोटे भौगोलिक क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने और स्थानीय गतिविधियों की निगरानी को मजबूत करने की कवायद मानी जा रही है।
शताब्दी वर्ष के बाद संगठन की अगली प्राथमिकताएं
संघ ने अक्टूबर 2025 में स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए थे। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम विजयादशमी, 20 अक्टूबर तक चलने हैं। ऐसे में इंदौर की बैठक शताब्दी वर्ष के अंतिम चरण में हो रही महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल है। बैठक में पिछले एक वर्ष के दौरान चलाए गए कार्यक्रमों और अभियानों की समीक्षा होगी। शाखाओं के विस्तार, सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों और विभिन्न प्रांतों में संगठन के कामकाज की रिपोर्ट भी रखी जाएगी। जुलाई में कर्नाटक के बेलगावी में हुई अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में संगठन विस्तार और शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा हुई थी। इंदौर में होने वाली बैठक को उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाली बैठक के रूप में देखा जा रहा है। यानी इंदौर की बैठक का फोकस केवल शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन का क्षेत्रीय ढांचा किस तरह बदलेगा, जिम्मेदारियां किस स्तर पर तय होंगी और शताब्दी वर्ष के बाद संघ की गतिविधियों को किस संरचना में आगे बढ़ाया जाएगा—इन सवालों पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण होगी।
