- मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के नियम बदले
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में अब मेयर, नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्ष या पार्षद बनने की इच्छा रखने वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को अब 1.6 गुना अधिक राशि जमानत के रूप में जमा करानी होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में बदलाव करते हुए जमानत राशि में इजाफा कर दिया है। यह बढ़ोत्तरी लगभग 12 साल बाद की गई है। इसके अलावा किसी भी महापौर या अध्यक्ष को कुर्सी से हटाने (रिकॉल) के लिए भी अब छह माह की टाइम लिमिट तय कर दी है। राच्य निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब महापौर या अध्यक्ष पद के लिए संबंधित निकाय का वोटर ही प्रस्तावक बनेगा, इसी तरह पार्षद पद के लिए उसी वार्ड के किसी मतदाता का प्रस्तावक होना अनिवार्य होगा।
चुनावी खर्च पर लगेगा पहरा, अलग बैंक खाता अनिवार्य
चुनावों में बेतहाशा खर्च और धनबल के इस्तेमाल पर भी नकेल कसी गई है। अब जो भी व्यक्ति महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का चुनाव लड़ेगा, उसे पर्चा भरने से पहले ही किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एक नया बैंक खाता खोलना होगा। चुनाव प्रचार से लेकर तमाम तरह की कमाई और खर्च इसी खाते से किए जाएंगे और इसकी पूरी जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। इसके साथ ही रिजल्ट आने के ठीक 30 दिन के अंदर उम्मीदवार को अपने चुनाव खर्च का पूरा लेखा-जोखा जमा करना होगा, जिसमें पर्चा भरने से लेकर वोटों की गिनती तक का हिसाब होगा। अगर बिना ठोस वजह के कोई यह हिसाब तय समय पर नहीं देगा, तो उसे भविष्य में चुनाव लडऩे से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि आयोग को यह अधिकार होगा कि वह राजपत्र में आदेश के 30 दिन के भीतर आवेदन मिलने पर इस रोक को हटा या कम भी कर सकता है। मध्य प्रदेश सरकार ने नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है।
यह है सिक्योरिटी डिपॉजिट का नया गणित
नगरीय निकायों में किस्मत अजमाने का इरादा रखने वालों को अब अपनी जेब ढीली करनी होगी। पार्षद पद के लिए अब नगर परिषद में 1600 रुपये, नगरपालिका में 4800 रुपये और नगर निगम में 8000 रुपये जमानत राशि यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा करने होंगे। इसी तरह नगर परिषद अध्यक्ष के प्रत्याशी को 16,000, नगरपालिका अध्यक्ष के उम्मीदवार को 24,000 रुपये और नगर निगम के महापौर पद के अभ्यर्थी को 32,000 रुपये जमानत के तौर पर जमा कराने होंगे। इसमें महिलाओं और एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को राहत दी गई है और उन्हें इस प्रतिभूति राशि का सिर्फ आधा पैसा ही जमा करना होगा। नियमों के तहत अब तक नगर परिषद में पार्षद पद के लिए 1,000 और अध्यक्ष पद के लिए 10,000 रुपये की जमानत राशि जमा करनी होती थी। इसी तरह नगरपालिका में पार्षद पद के लिए 3,000 रुपये, अध्यक्ष पद के लिए 15,000, नगर निगम के पार्षद के लिए 5,000 और महापौर (मेयर) पद के लिए जमानत की रकम 20,000 रुपये थी।
मतपत्रों और ईवीएम पर पद भी होगा अंकित
अगर किसी शहर की जनता चुने हुए महापौर, अध्यक्ष या पार्षद को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू करती है, तो राच्य निर्वाचन आयोग को सूचना के बाद पूरी कार्रवाई छह महीने के भीतर हर हाल में पूरी करनी होगी। इसके अलावा यदि किसी कारण से कोई पद खाली होता है, तो संबंधित आयुक्त या मुख्य नगरपालिका अधिकारी की यह जिम्मेदारी होगी कि वे ठीक सात दिन के अंदर इसकी सूचना जिला निर्वाचन अधिकारी को दें। इसके साथ ही अब मतपत्रों (बैलेट पेपर या ईवीएम स्क्रीन) पर भी यह साफ
