कागजों में नल, जमीन पर सूखे गांव

कागजों में नल
  • जल जीवन मिशन में 3.85 करोड़ का खेल
  • ईओडब्ल्यू ने तीन इंजीनियर और ठेकेदार पर दर्ज की एफआईआर
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। जल जीवन मिशन के जरिए गांवों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने की योजना में कागजी काम पूरा दिखाकर करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सामने आया है। मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड में ईओडब्ल्यू की जांच में करीब 3.85 करोड़ रुपये के कथित गबन और फर्जी भुगतान का खुलासा हुआ है। मामले में पीएचई के तीन तत्कालीन इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
    जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में कई गांवों में पानी की टंकियां, पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन के काम स्वीकृत किए गए थे। ठेका शिवेन्द्र कुमार तिवारी को दिया गया, लेकिन मौके पर कई काम अधूरे मिले। इसके बावजूद दस्तावेजों में काम पूरा दर्शाकर भुगतान जारी कर दिया गया।
    4400 मीटर पाइपलाइन कागजों में, 315 घरों में नल गायब
    ग्राम खटखरी में 4400 मीटर पाइपलाइन बिछाने और 315 घरों में नल कनेक्शन देने का दावा किया गया था। जांच के दौरान मौके पर न तो पाइपलाइन मिली और न ही घरों में नल फिटिंग। यहां बनाई गई पानी की टंकी भी परीक्षण और जलभराव के दौरान ढह गई। करह (खैरागढ़), शिवराजपुर और जुड़मनिया रघुनाथ में भी निर्माण और जलापूर्ति से जुड़े कामों में गड़बड़ियां मिलीं। कहीं स्वीकृत मोटरों की जगह एक ही पंप लगाया गया तो कहीं टंकी और सम्पवेल का निर्माण तक नहीं हुआ।
    भुगतान हुआ, पानी नहीं पहुंचा
    ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक फर्जी माप पुस्तिकाओं और बिलों के आधार पर काम पूरा दर्शाया गया और करीब 3.85 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। दूसरी ओर जिन गांवों में यह राशि खर्च दिखाई गई, वहां पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। इससे योजना के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हुए हैं। जिन ग्रामीण परिवारों तक नल से पानी पहुंचना था, वे अब भी वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर बताए गए हैं। मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, सहायक यंत्री संजय पाण्डेय, उपयंत्री ए.पी. तिवारी और ठेकेदार शिवेन्द्र कुमार तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।

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