
– हलफनामे में 35 साल पुराने केस की जानकारी छुपाने का आरोप
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। उपचुनाव में कांग्रेस की दतिया सीट बरकरार रखने वाले घनश्याम सिंह की भी घेराबंदी शुरू हो गई है। सिंह की जीत को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इसमें भी उसी तरह की कमी निकाली गई गई, जैसी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी रहीं मीनाक्षी नटराजन के चुनावी शपथ पत्र में बताई गई थी। याचिका में आपत्ति जताई गई है कि कांग्रेस विधायक सिंह ने अपने हलफनामे में 35 साल पुराने एक प्रकरण का ब्यौरा नहीं दिया है। यह आचार संहिता का उल्लंघन है। हालांकि विधायक सिंह ने इसके पीछे भी दतिया के पूर्व विधायक कांग्रेस से निष्कासित राजेंद्र भारती का षड्यंत्र बताया है। हाईकोर्ट में कांग्रेस विधायक सिंह के खिलाफ यह याचिका अधिवक्ता दीपक बेलपत्री युवक ने लगाई है। बेलपत्री भाजपा नेता बताए जा रहे हैं। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस विधायक ने 1991 की एक एफआईआर का हलफनामे में उल्लेख नहीं किया है। अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से 17 सितंबर को दायर की गई याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव के समय घनश्याम सिंह ने अपने शपथ पत्र में दो आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी, लेकिन करीब 35 वर्ष पुराने एक अन्य मामले को उसमें शामिल नहीं किया गया।
विधायक सिंह बोले- भारती के ही लोग सक्रिय हैं
इस मामले में दतिया से कांग्रेस विधायक सिंह ने कहा कि मैं सात चुनाव लड़ चुका है। जीता भी और हारा भी, तब भी किसी चुनाव में मैंने इस केस का जिक्र नहीं किया था, तब तो किसी को आपत्ति नहीं हुई। अब लोगों को यह केस कैसे याद आ गया। उन्होंने इसके पीछे कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक भारती की सक्रियता बताई। सिंह का कहना है कि याचिका लगाने वाले बेलपत्री भारती के राइट हैंड हैं। भाजपा प्रत्याशी के एक करीबी रिश्तेदार के साथ मिलकर बेलपत्री ने मामला तैयार किया है। बेलपत्री तो कांग्रेस से निष्कासित भी नहीं हैं। वह कांग्रेस कार्यकर्ता ही हैं। वैसे भी यह मामला मेरी जानकारी में ही नहीं है। मेरे खिलाफ चार केस थे, सभी राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़े थे।
