एमपी में बढ़ा बेटियों को गोद लेने का चलन

गोद लेने का चलन
  • 781 बच्चों को मिले परिवार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में बच्चों को गोद लेने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी की नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025-26 में राज्य में 207 बच्चों को गोद लेकर परिवारों को सौंपा गया। यह पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा संख्या है। रिपोर्ट के अनुसार,2025-26 के बीच मध्य प्रदेश में कुल 781 बच्चों को गोद लिया गया। सीएआरए के ये डेटा 2021-22 से 2025-26 के बीच राज्य के लिए सबसे अच्छे आंकड़े माना जा रहा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया लगातार जारी रही है।
लड़कियों को गोद लेने की संख्या ज्यादा: इन 5 साल के आंकड़ों में एक खास बात सामने आई है। इस दौरान लडक़ों की तुलना में लड़कियों को ज्यादा गोद लिया गया। कुल गोद लिए गए बच्चों में करीब 53.39 फीसदी लड़कियां और 46.61 फीसदी लडक़े थे। साल 2022-23 को छोड़ दें तो बाकी सभी वर्षों में लडक़ों के मुकाबले लड़कियों को ज्यादा परिवार मिले। वहीं, ‘अन्य’ लिंग श्रेणी में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।
देश में 9वें नंबर पर रहा मध्य प्रदेश: साल 2025-26 में 207 बच्चों को गोद लिए जाने के साथ मध्य प्रदेश देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 9वें स्थान पर रहा। देश में इस दौरान कुल 4603 बच्चों को गोद लिया गया। महाराष्ट्र और गुजरात इस मामले में सबसे आगे रहे। दोनों राज्यों में मिलाकर देश के कुल गोद लेने के मामलों का 27 फीसदी हिस्सा रहा।
दूसरे राज्यों में भी लड़कियों की संख्या ज्यादा
लड़कियों को गोद लेने का यह ट्रेंड सिर्फ मध्य प्रदेश में ही नहीं दिखा। तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा में भी गोद लिए गए बच्चों में लड़कियों की संख्या 53 से 56 फीसदी के बीच रही। उत्तर प्रदेश में लड़कियों को गोद लेने का अनुपात सबसे ज्यादा रहा। यहां कुल गोद लिए गए बच्चों में 63.9 फीसदी लड़कियां थीं। वहीं, गुजरात में लडक़ों की संख्या थोड़ी ज्यादा रही। वहां करीब 50.5 फीसदी लडक़े गोद लिए गए।
जागरूकता बढऩे का असर?: मध्य प्रदेश में गोद लेने के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे लोगों में बढ़ती जागरूकता, गोद लेने की प्रक्रिया तक बेहतर पहुंच और सरकारी स्तर पर मिल रहा सहयोग जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता कि इनमें से किस वजह का सबसे ज्यादा असर रहा।
विदेशों में क्या हैं हाल
गौर करने वाली बात यह है कि, विदेश में भी लाड़लियां ही दंपतियों की पहली पसंद बन रही हैं.महिला बाल विकास के संयुक्त संचालक विशाल नाडकर्णी ने बताया कि, प्रदेश की राजधानी भोपाल में मातृछाया भारत की एक ऐसी मात्र संस्था है इसमें बच्चे गोद लेने के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आ रहे हैं
आसान हुई गोद लेने की प्रक्रिया: महिला बाल विकास के संयुक्त संचालक विशाल नाडकर्णी ने कहा कि, मोदी सरकार ने बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को आसान किया है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 में संशोधन किया गया है. उन्होंने कहा कि, पूरे देश में बच्चों को गोद लेने की प्रतीक्षा सूची में लाखों लोग शामिल थे, कुछ साल पहले ही महिला सशक्तिकरण संचालनालय ने प्रतीक्षा सूची में पारदर्शिता लाने के लिए बच्चा गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा शुरू की थी। पहले बच्चों को गोद लेने में काफी कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

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