तीन महीने से उधारी में चल रहा हॉस्टलों का संचालन

  • नया पोर्टल तैयार होने तक नहीं जारी होगी राशि,  660 छात्रावासों में भोजन से लेकर जरूरी खर्च तक प्रभावित

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
छात्रावासों के संचालन में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार नई व्यवस्था तैयार कर रही है, लेकिन इसका असर फिलहाल प्रदेश के हॉस्टलों पर आर्थिक संकट के रूप में दिखाई दे रहा है। राजधानी सहित प्रदेश के 660 छात्रावासों को तीन महीने से बजट नहीं मिला है। राशि अटकी होने के कारण कई छात्रावास बाजार से उधारी लेकर बच्चों के भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का इंतजाम कर रहे हैं। विभाग अब एसएनए स्पर्श पोर्टल के जरिए छात्रावासों का बजट सीधे उनके खातों में भेजने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार नया पोर्टल शुरू होने के बाद भारत सरकार और राज्य सरकार के अंशदान की राशि सीधे छात्रावास के खाते में पहुंचेगी। पोर्टल पर दर्ज विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर राशि जारी की जाएगी।
अब तक छात्रावासों को पीएमएस पोर्टल के माध्यम से राशि जारी की जाती थी। केंद्र और राज्य का अंशदान पहले राज्य शिक्षा केंद्र को मिलता था और वहां से जिलों को बजट भेजा जाता था। इस व्यवस्था में राशि के वितरण को लेकर अनियमितताओं और आरोपों की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। हालांकि पोर्टल बदलने की प्रक्रिया के बीच पुरानी व्यवस्था से भी राशि जारी नहीं हो रही है। नतीजा यह है कि छात्रावासों के वार्डन को रोजमर्रा के खर्च के लिए स्थानीय बाजार से उधारी पर सामान लेना पड़ रहा है।
आटा-दाल से लेकर सब्जी तक उधारी
छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के लिए प्रतिदिन भोजन और नाश्ते की व्यवस्था करनी होती है। इसके लिए आटा, दाल, चावल, सब्जी और अन्य खाद्य सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ रही है। तीन महीने से बजट नहीं आने के कारण कई जगह दुकानदारों का भुगतान लंबित है। वार्डनों का कहना है कि सरकार से राशि मिलने के बाद ही बाजार की उधारी चुकाई जा सकेगी। लगातार भुगतान अटकने से स्थानीय स्तर पर व्यवस्था चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
बच्चों की जरूरतों के लिए कई मदों में मिलेगा बजट
नई व्यवस्था में सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि आवास व्यवस्था, शिक्षण सामग्री, रख-रखाव, टेबल-कुर्सी और अन्य जरूरी मदों का बजट भी शामिल किया जाएगा। जिलों में इसकी निगरानी डीपीसी के स्तर से की जाएगी। प्रदेश में करीब 660 छात्रावास संचालित हैं। इनमें लगभग 125 बालक छात्रावास हैं, जबकि बड़ी संख्या में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास व्यवस्था संचालित की जा रही है। अधिकांश छात्रावास स्कूल परिसरों में ही हैं, ताकि बच्चों के रहने और पढ़ाई की व्यवस्था एक ही स्थान पर हो सके। सरकार का दावा है कि नया पोर्टल शुरू होने के बाद राशि वितरण में पारदर्शिता आएगी और ऑनलाइन दर्ज विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में बजट सीधे संबंधित छात्रावास के खाते में पहुंचेगा। लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पोर्टल की तैयारी के इंतजार में तीन महीने से रुका बजट छात्रावासों तक कब पहुंचेगा।

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