
- वाणिज्यिक कर विभाग में 50-50 प्रमोशन फॉर्मूले पर बढ़ा विवाद
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग में असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (एसीटीओ) के पद पर प्रमोशन से पहले ही कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टर (सीटीआई) और टैक्स असिस्टेंट (टीए) के बीच कैडर की लड़ाई तेज हो गई है। विभाग ने प्रमोशन का रास्ता खोलने के लिए दोनों संवर्गों के मर्जर का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है, जबकि सीटीआई संघ ने इस पूरी कवायद को चुनौती देते हुए टीए संवर्ग को ही विवाद के केंद्र में ला दिया है। विभाग का तर्क है कि सीटीआई और टीए दोनों एसीटीओ के समानांतर फीडर कैडर हैं। इसलिए दोनों की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार होने के बाद ही प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन भी करना होगा। त्र्रष्ठ की सहमति मिलने के बाद प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कमर्शियल टैक्स विभाग ने स्पष्ट किया है कि सीटीआई और टीए का प्रस्तावित मर्जर कैडर मर्जर नहीं है। इसका उद्देश्य दोनों फीडर कैडर की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार कर एसीटीओ पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ करना है। विभाग ने सीटीआई की इस दलील को भी खारिज किया है कि एसीटीओ पद पर उनकी दावेदारी टीए से अधिक है। विभाग के अनुसार कानून दोनों को समानांतर फीडर कैडर मानता है। शुरुआती भर्ती प्रक्रिया अलग होने मात्र से टीए को अधीनस्थ या प्रमोशन के लिए अयोग्य नहीं माना जा सकता। विभाग ने 15 दिसंबर 2008 के गजट नोटिफिकेशन और 6 अप्रैल 2013 के संशोधन का हवाला देते हुए कहा है कि एसीटीओ के 50 प्रतिशत पद सीटीआई और 50 प्रतिशत पद टीए से भरे जाने हैं। शेड्यूल-चार में भी दोनों को फीडर कैडर के रूप में शामिल किया गया है।
हाईकोर्ट के फैसलों को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्या
विभाग का कहना है कि दोनों संवर्गों की कानूनी स्थिति समान है और यह व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा वैधानिक संशोधन के जरिए लागू की गई है। विभाग के मुताबिक हाईकोर्ट ने भी दोनों कैडर को कानूनी रूप से समान माना है। विभाग ने यह भी दावा किया कि कोर्ट द्वारा कैबिनेट और वित्त विभाग की मंजूरी तथा विभागीय आदेशों की जांच के दौरान टीए पदों पर कार्यकाल की पाबंदी या अस्थायी प्रकृति नहीं पाई गई। लेकिन सीटीआई संघ विभाग की इस व्याख्या से पूरी तरह असहमत है।
समान वेतनमान से दोनों संवर्ग बराबर नहीं हो जाते
मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर निरीक्षक संघ ने विभाग के तर्कों को खारिज करते हुए 21 जुलाई 2026 के हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के फैसले का हवाला दिया है। संघ का कहना है कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल समान वेतनमान के आधार पर सीटीआई और टीए को समान संवर्ग नहीं माना जा सकता। संघ का दावा है कि दोनों अलग संवर्ग हैं और ऐसे में इंदौर सिंगल बेंच का फैसला स्वत: प्रभावहीन हो जाता है। संघ ने 2008 और 2013 में किए गए संशोधनों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। संघ का तर्क है कि दो पूरी तरह अलग संवर्गों को समान करने से पहले मप्र रूल्स ऑफ बिजनेस के नियम 11(1)(क) के तहत कैबिनेट और वित्त विभाग की मंजूरी आवश्यक थी। संघ के मुताबिक संबंधित अधिसूचनाओं में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
50-50 व्यवस्था पर भी सवाल
विभाग जहां 50 प्रतिशत एसीटीओ पद सीटीआई और 50 प्रतिशत टीए से भरने की व्यवस्था को वैधानिक संशोधन का परिणाम बता रहा है, वहीं सीटीआई संघ इसे चुनौती दे रहा है। संघ का कहना है कि पदोन्नति के पदों में आरक्षण का प्रावधान संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए हो सकता है, किसी विशेष संवर्ग के लिए नहीं। संघ यह भी रेखांकित कर रहा है कि सीटीआई पद राज्य सिविल सेवा परीक्षा के 38 क्लासिफाइड पोस्ट में शामिल है।
