352 निकायों में सीवेज नेटवर्क नहीं, 1315 नालों से नदियां प्रदूषित

नदियां प्रदूषित

बिच्छू डॉट कॉम। एनजीटी की प्रिसिंपल बेंच ने मध्य प्रदेश में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन की बदहाल स्थिति पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। बेंच ने सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आंकड़ों को अविश्वसनीय मानते हुए सभी कलेक्टरों को जमीनी सत्यापन कर वास्तविक रिपोर्ट 3 माह में तलब की है। एनजीटी ने पाया कि राज्य के 413 नगरीय निकायों में से 352 निकायों में सीवेज ट्रीटमेंट नहीं है। 1,315 नालों से 584.81 एमएलडी सीवेज बिना सीधे नर्मदा और शिप्रा जैसी नदियों और जलाशयों में बह रहा है। केवल शहरी और ग्रामीण निकायों की कागजी रिपोर्ट पर भरोसा न करते हुए कलेक्टरों को कचरा संग्रहण, पृथक्कीकरण और प्रोसेसिंग के आंकड़ों की मौके पर जांच करने के निर्देश। 110 निकायों में 12.86 लाख मी. टन लेगेसी वेस्ट का निपटान दिसंबर तक पूरा करना अनिवार्य। कम कचरे वाले 303 निकाय भी समय सीमा में सफाई करें। एनजीटी ने मध्य प्रदेश में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की रिपोर्ट का परीक्षण किया। रिपोर्ट के अनुसार, 352 नगरीय निकायों में रोजाना निकलने वाल सीवेज के उपचार की फिलहाल सुविधा नहीं है। इनमें हरदा, धार, गंजबासौदा, इटारसी, मंडीदीप, सबलगढ़, झाबुआ जैसे नगरीय निकाय शामिल हैं। इनके लिए 736 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित किए गए हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं की समयसीमा और उन्हें किस तरह पूरा किया जाएगा, इसका स्पष्ट विवरण रिपोर्ट में नहीं दिया गया।

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