- इटली, स्पेन और इंग्लैंड के 3 कपल ने सात फेरे लिए, उज्जैन में बारात भी निकली

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में शनिवार शाम आस्था, प्रेम और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इटली, स्पेन और इंग्लैंड से आए तीन विदेशी जोड़ों ने अपनी जिंदगी के सबसे खास पड़ाव के लिए उज्जैन को चुना और पश्चिमी तौर-तरीकों के बजाय हिंदू वैदिक परंपरा के अनुसार विवाह किया।
वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच अग्नि को साक्षी मानकर तीनों जोड़ों ने सात फेरे लिए। निनोरा स्थित आनंदमय वेलनेस रिट्रीट में शाम 6 बजे से रात 8:30 बजे तक विशेष विवाह समारोह आयोजित किया गया। डॉ. ओमानंद गुरुजी के सान्निध्य में हुए समारोह में तीनों जोड़ों ने पूरे भारतीय रीति-रिवाजों के साथ विवाह की रस्में निभाई। विवाह के दौरान विदेशी दूल्हे और दुल्हनें भारतीय परिधान में नजर आए। विदेशी चेहरों के लिए योग ने उन्हें भारत से जोड़ा, भारतीय जीवन दर्शन ने प्रभावित किया और यही आकर्षण ने उन्हें अपने जीवन के खास संस्कार के लिए महाकाल की नगरी तक खींच लाया।
योग और आध्यात्मिकता से जुड़े हैं तीनों जोड़े
खास बात यह है कि तीनों विदेशी जोड़े डॉ. ओमानंद गुरुजी के शिष्य हैं। योग, ध्यान, भक्ति और भारतीय आध्यात्मिक जीवन से प्रभावित होकर इन लोगों ने सनातन परंपरा को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आध्यात्मिक नाम भी अपनाए हैं। इसी आस्था के चलते उन्होंने अपने विवाह के लिए भी भारतीय वैदिक परंपरा को चुना।
विवाह को रस्म नहीं, संस्कार मानते हैं डॉ. ओमानंद गुरुजी के अनुसार, विदेशी साधकों के लिए भारतीय विवाह सिर्फ सामाजिक या कानूनी समझौता नहीं है। भारतीय परंपरा में विवाह को दो परिवारों और दो आत्माओं के बीच जीवनभर का संबंध माना जाता है।
सबको दिए हिंदू नाम सरनेम में जुड़ा आनंदम
विदेशी जोड़ों को वैवाहिक बंधन में बांधने वाले डॉ. ओमानंद गुरु बताते हैं योग दर्शन में मनुष्य के अस्तित्व को समझाते हुए आनंदमय कोष की अवधारणा आती है। सनातन दर्शन में मनुष्य के वास्तविक स्वरूप को सच्चिदानंद से भी जोड़ा जाता है। इसी भाव के साथ विदेशी जोड़ो के नामों में आनंद जोड़ा गया है यानी जीवन में बाहरी उपलब्धियों से आगे बढक़र भीतर के आनंद की तलाश । उज्जैन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के साथ यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा से प्रभावित होते हैं। सात फेरों के दौरान लिए जाने वाले संकल्प, परिवार को महत्व देने और रिश्तों को जीवन भर निभाने की भारतीय सोच इन विदेशी साधकों को प्रभावित करती है। यही वजह है कि योग और अध्यात्म के लिए भारत आने वाले कई विदेशी अब भारतीय संस्कारों को भी अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।
इटली के दो जोड़े शामिल
पहले जोड़े में इटली की ईवा, जिन्हें मा दर्पण आनंद के नाम से जाना जाता है, और इटली के ही मास्सिमिलियानो, जिन्हें बलराम आनंद नाम मिला है, विवाह बंधन में बंधे। दूसरे जोड़े में इटली की जेसिका मा सीता आनंद और लुका राम आनंद ने वैदिक परंपरा के अनुसार सात फेरे लिए।
स्पेन और इंग्लैंड का भी हुआ आध्यात्मिक मिलन
तीसरे जोड़े में स्पेन की इन्मा, जिन्हें मा शांति आनंद नाम दिया गया है, और इंग्लैंड के मार्क, जिन्हें प्रकाशानंद के नाम से जाना जाता है, ने विवाह किया। दोनों ने भी अग्नि को साक्षी मानकर वैदिक मंत्रों के बीच विवाह की रस्में पूरी कीं।
