उद्योग लगाने की मंजूरी से जमीन तक… अब सिंगल विंडो में

  • नया एक्ट, नया निवेश मॉडल
  • गौरव चौहान
उद्योग

मध्य प्रदेश में निवेश का रास्ता आसान करने के लिए सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 लागू कर दिया है। विधानसभा की मंजूरी और राज्यपाल की अनुमति के बाद इसका नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। सरकार ने इस कानून के जरिए उद्योगों को अनुमति, जमीन, निरीक्षण और शिकायतों के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर से राहत देने के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है।
नए कानून का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि निवेशक अब डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए उद्योग से जुड़ी मंजूरियों, आवेदनों और शिकायतों का निराकरण करा सकेंगे। निर्धारित समय में आवेदन पर निर्णय नहीं होने पर मामला स्वत: उच्च अधिकारी के पास पहुंच जाएगा। निवेशक के आवेदन पर 15 दिन में निर्णय और सरकारी विभागों द्वारा अतिरिक्त जानकारी मांगने के लिए अधिकतम सात दिन की समयसीमा तय की गई है।
तीन साल तक निरीक्षण से राहत
सरकार ने नए उद्योगों के लिए निरीक्षण व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया है। स्थापना प्रमाण-पत्र मिलने के बाद उद्योग को तीन साल तक निरीक्षण से छूट मिलेगी। उत्पादन शुरू होने के बाद यह छूट दो साल और बढ़ाई जा सकेगी। इससे खासकर कम प्रदूषण वाले श्वेत और हरित उद्योगों को शुरुआती दौर में कारोबार स्थापित करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, आईटी-आईटीईएस, सोलर जनरेशन, चिकित्सा उपकरण, खेल सामग्री, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग, बेकरी, गारमेंट, फर्नीचर और कुछ दवा निर्माण जैसी इकाइयों को तत्काल उत्पादन शुरू करने की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है।
जमीन के इस्तेमाल में भी राहत
एक्ट में औद्योगिक जमीन से जुड़े प्रावधानों को भी आसान किया गया है। निवेशकों को सूचना देकर औद्योगिक जमीन का ट्रांसफर या पट्टा हासिल करने की सुविधा दी गई है। इसके अलावा औद्योगिक भूखंड को फ्रीहोल्ड कराने का विकल्प भी दिया गया है। नई औद्योगिक इकाइयों में शेड और भवन की ऊंचाई तथा एफएआर से जुड़े मानकों में बदलाव से उद्योगपतियों को अपनी जरूरत के मुताबिक निर्माण की गुंजाइश मिलेगी। सरकार नए औद्योगिक क्षेत्रों में वॉक-टू-वर्क कॉन्सेप्ट को बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसके तहत फैक्ट्रियों के आसपास कर्मचारियों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल, बाजार और परिवहन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। औद्योगिक क्षेत्रों के नजदीक टाउनशिप विकसित करने की योजना भी इसी दिशा में है।
अधिकारियों की जवाबदेही भी तय
निवेशकों की शिकायतों के लिए सिंगल विंडो में व्यवस्था रहेगी और इनकी निगरानी एमपीआईडीसी करेगा। समयसीमा में आवेदन या शिकायत का निपटारा नहीं करने वाले अधिकारियों पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। एक्ट के क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य निवेश सुविधा समिति बनाई गई है, जबकि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निवेश परियोजनाओं की अड़चनें दूर करेगी। नए निवेश के लिए एमपीआईडीसी को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
पुराने दो कानून खत्म
नए कानून के साथ सरकार ने मध्यप्रदेश निवेश संवर्धन अधिनियम, 2008 और मध्यप्रदेश उद्योगों की स्थापना एवं परिचालन का सरलीकरण अधिनियम, 2023 को निरस्त कर दिया है। अब निवेश से जुड़े प्रावधानों को एक नए कानूनी ढांचे में लाया गया है। आगामी जनवरी में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले लागू किया गया यह कानून सरकार के लिए निवेशकों को आकर्षित करने का अहम आधार बन सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक परीक्षा अब इसके जमीनी क्रियान्वयन और तय समयसीमा में विभागीय मंजूरियां मिलने से होगी।

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