यूसीसी पर मप्र में अगला कदम राष्ट्रपति भवन से तय होगा

  • मंजूरी के बाद नियम बनाने की तैयारी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में विधानसभा से आगे की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विधानसभा से पारित यूसीसी विधेयक-2026 को राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मंजूरी देकर राष्ट्रपति के पास भेज दिया है। अब राज्य सरकार की नजर राष्ट्रपति की स्वीकृति पर है। इसके बाद ही प्रदेश में यूसीसी लागू करने की कानूनी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचेगी। विधानसभा के मॉनसून सत्र में 20 जुलाई को यूसीसी विधेयक समेत एक दिन में रिकॉर्ड 14 विधेयक पेश किए गए थे। यूसीसी सहित आठ विधेयक 21 जुलाई और शेष छह विधेयक 22 जुलाई को पारित हुए थे। विधानसभा से पारित होने के करीब दो सप्ताह बाद सभी 14 विधेयक राजभवन भेजे गए थे। विधि एवं विधायी शाखा से परीक्षण के बाद राज्यपाल ने यूसीसी विधेयक को मंजूरी दी और बुधवार को इसे राष्ट्रपति के विचार के लिए भेज दिया गया।
यूसीसी विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण संवैधानिक पड़ाव है, लेकिन इससे कानून तत्काल प्रभावी नहीं होगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार को विस्तृत नियम तैयार कर उन्हें अधिसूचित करना होगा। इन नियमों में कानून के क्रियान्वयन की प्रक्रिया, पंजीयन, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और विभिन्न प्रावधानों को लागू करने की व्यवस्था स्पष्ट की जाएगी। सरकार का विधि एवं विधायी कार्य विभाग पहले से ही नियमों के प्रारूप पर काम कर रहा है। विभाग अन्य राज्यों में लागू या तैयार किए गए यूसीसी के कानूनी प्रारूपों का अध्ययन भी कर रहा है, ताकि राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही नियम बनाने की प्रक्रिया में ज्यादा समय न लगे। हालांकि, राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले नियमों में औपचारिक बदलाव नहीं किए जाएंगे। मंजूरी के बाद ही विधेयक के अनुरूप नियमों को अंतिम रूप देकर आवश्यक संशोधन और अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विवाह से उत्तराधिकार तक एक कानून का दावा
मप्र के यूसीसी विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानूनी व्यवस्था प्रस्तावित है। सरकार का तर्क है कि इससे अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर समान नागरिक नियम लागू होंगे और कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित होगी। विधेयक में बहुविवाह पर रोक, तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन, लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन और बेटे-बेटी को उत्तराधिकार में समान अधिकार जैसे प्रावधान शामिल हैं। विवाह की न्यूनतम आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष रखी गई है। तलाक और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
आदिवासी आबादी को दायरे से बाहर रखा
यूसीसी के दायरे में प्रदेश की करीब 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी को बाहर रखा गया है। वहीं विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कुछ प्रावधानों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान भी किया गया है। इसमें पंजीयन नहीं कराने, पहचान छिपाने या धोखाधड़ी जैसे मामलों में कार्रवाई का प्रावधान शामिल है।
मप्र के बाद अब राष्ट्रपति की मंजूरी पर निगाह
मध्यप्रदेश यूसीसी विधेयक पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बताया जा रहा है। इससे पहले भाजपा शासित राज्यों में उत्तराखंड, गुजरात और असम ने इस दिशा में कदम उठाया है। इनमें उत्तराखंड को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद वहां यूसीसी लागू हो चुका है। गुजरात और असम के विधेयकों को अभी राष्ट्रपति की स्वीकृति का इंतजार है। ऐसे में मप्र में अब राजनीतिक बहस से ज्यादा महत्वपूर्ण अगला संवैधानिक पड़ाव राष्ट्रपति की मंजूरी और उसके बाद नियमों की अधिसूचना होगी। सरकार के लिए असली चुनौती विधेयक को विधानसभा से पारित कराने के बाद उसके प्रावधानों को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने की विस्तृत व्यवस्था तैयार करना होगी।

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