त्विषा शर्मा मामले में पुलिस के नाम पर फुटेज लेने वाले तीन अधिवक्ता कौन थे

  • घटनास्थल सील करने से लेकर फंदे की बेल्ट डाक्टरों को नहीं देने तक कई सवाल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
त्विषा शर्मा मामले में सीबीआई की 636 पन्नों की चार्जशीट और गवाहों के बयानों से अब केवल मानसिक प्रताडऩा के आरोप ही नहीं, बल्कि घटना के बाद की पुलिस कार्रवाई और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 13 मई को दोपहर करीब 1:30 बजे त्विषा के ब्यूटी पार्लर पहुंचे दो पुरुष और एक महिला कौन थे, जिन्होंने खुद को अधिवक्ता बताया और पुलिस को जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज चाहिए, कहकर रिकॉर्डिंग हासिल कर क्षी? उन्हें यह फुटेज लेने की अनुमति किसने दी दी थी? क्या उनके पास पुलिस का कोई लिखित आदेश था? जब पुलिस जांच कर रही थी तो सीसीटीवी जैसा अहम साक्ष्य जांच अधिकारी ने सीधे क्यों नहीं लिया? इसी के साथ पुलिस अधिकारी के बयान में घटनास्थल को पूरी तरह सील नहीं किए जाने और फंदे में इस्तेमाल बेल्ट पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों को नहीं सौंपे जाने का सवाल भी सामने आता है।
12:30 बजे पुलिस को मिली सूचना: सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा के बयान के मुताबिक 13 मई को रात 12:30 बजे यानी 12 मई की रात के बाद तडक़े उन्हें एम्स भोपाल से सूचना मिली कि त्विषा ने घर की छत पर फांसी लगा ली है। इसके बाद करीब 2:30 से 3 बजे पुलिस बागमुगालिया स्थित घर की छत पर पहुंची। वहां लोहे के पाइप से नायलान की दो काली बेल्टनुमा पट्टियां लटकी मिलीं। पास में पलंग, गद्दे-कपड़े और लाल रंग का मोबाइल था। पहली मंजिल के कमरे में लैपटॉप भी मिला। दिनेश शर्मा के अनुसार कमरे को सील किया गया और छत के दरवाजे पर कुंडी लगाई गई, लेकिन सीबीआई की पूछताछ में यह सवाल उभरा कि जिस छत पर फंदा मिला था, उसे पूरी तरह सील क्यों नहीं किया गया।
नहीं फंदे की बेल्ट डाक्टरों तक क्यों पहुंची?
13 मई सुबह 8 बजे एफएसएल जोन-2 के डा. बड़ोनिया को सूचना दी गई और 9 बजे घटनास्थल का निरीक्षण हुआ। मोबाइल, लैपटॉप और दो रिंग सहित बेल्ट जब्त की गईं। सीबीआई ने दिनेश शर्मा से पूछा कि फंदे में इस्तेमाल नायलॉन बेल्ट पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों को क्यों नहीं सौंपी गईं। उन्होंने तबीयत खराब होने की बात कहते हुए इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही।

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