मध्यप्रदेश भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी

  • प्रदेश प्रभारी से मीडिया प्रभारी तक बदलेंगे चेहरे

गौरव चौहान
मध्यप्रदेश भाजपा में लंबे समय से चल रही संगठनात्मक नियुक्तियों की प्रतीक्षा अब खत्म होने की स्थिति में है। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की नई टीम के गठन के बाद प्रदेश संगठन में भी खाली और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों की कवायद तेज हो गई है। आने वाले दिनों में प्रदेश भाजपा को नया संगठन महामंत्री और नया प्रदेश प्रभारी मिलने के साथ ही मीडिया विभाग में भी नया चेहरा दिखाई दे सकता है। एक साथ होने वाले इन बदलावों को केवल खाली पदों को भरने की कवायद नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों के हिसाब से प्रदेश संगठन की नई कार्यशैली तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों में भाजपा के राजनीतिक हितों के साथ राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीति, संघ की पसंद और प्रदेश की सत्ता-संगठन के बीच बेहतर तालमेल को भी प्राथमिकता दी जाएगी। यही वजह है कि संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और मीडिया प्रभारी के नामों को लेकर भाजपा के भीतर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
मध्यप्रदेश भाजपा में प्रदेश संगठन महामंत्री का पद करीब पांच महीने से खाली है। हितानंद शर्मा के संघ में वापस लौटने के बाद से इस पद पर नए चेहरे की तलाश चल रही है। संगठन के भीतर कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन अब तक किसी एक नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। अब संघ और भाजपा की हालिया समन्वय बैठक के बाद इस नियुक्ति की संभावना मजबूत मानी जा रही है। विशाखापट्टनम में हुई तीन दिवसीय समन्वय बैठक में भाजपा और संघ के बीच संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बाद माना जा रहा है कि संघ अपने कुछ ऐसे पदाधिकारियों को भाजपा की जिम्मेदारी के लिए मुक्त कर सकता है, जो फिलहाल किसी अनुषांगिक संगठन में दायित्व निभा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश के संगठन महामंत्री के लिए संघ की पृष्ठभूमि वाले ऐसे चेहरे को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिसे संगठन संचालन और कार्यकर्ता नेटवर्क की अच्छी समझ हो। इससे यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी इस पद पर किसी ऐसे नेता को लाना चाहती है, जो सत्ता और संगठन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने में सक्षम हो।
जामवाल की जिम्मेदारी बढऩे की चर्चा
प्रदेश संगठन महामंत्री की नियुक्ति के बीच क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल को लेकर भी भाजपा के भीतर चर्चा तेज है। फिलहाल जामवाल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के संगठनात्मक कामकाज से जुड़े हुए हैं। पार्टी के भीतर संभावना जताई जा रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई जा सकती है और उन्हें दो-तीन अन्य राज्यों का दायित्व भी दिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मध्यप्रदेश में जामवाल का पहले की तरह ज्यादा समय देना मुश्किल होगा। ऐसे में प्रदेश के लिए अलग संगठन महामंत्री की जरूरत और बढ़ जाएगी। यही कारण है कि जामवाल की संभावित नई भूमिका और मध्य प्रदेश में नए संगठन महामंत्री की नियुक्ति को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के लिए यह बदलाव आने वाले समय में संगठन को ज्यादा सक्रिय और चुनावी दृष्टि से तैयार करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
प्रदेश प्रभारी भी बदलने के संकेत
संगठन महामंत्री के साथ मध्यप्रदेश भाजपा को नया प्रदेश प्रभारी मिलने की संभावना भी बढ़ गई है। मौजूदा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह के उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा चुनावी तैयारियों में सक्रिय रहने की संभावना है। उनका गृह राज्य उत्तर प्रदेश होने के कारण पार्टी वहां उनकी भूमिका बढ़ा सकती है। ऐसे में मध्य प्रदेश का प्रभार किसी दूसरे राष्ट्रीय स्तर के नेता को सौंपे जाने की चर्चा है। पार्टी की राष्ट्रीय टीम में शामिल किसी नेता को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ सह-प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति भी संभव है। सह-प्रदेश प्रभारी का पद भी लंबे समय से प्रभावी रूप से खाली माना जा रहा है। पहले दिल्ली के सतीश उपाध्याय इस भूमिका में थे, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद उनकी मध्यप्रदेश में सक्रियता कम हो गई। ऐसे में संगठन अब इस पद पर भी नए चेहरे की तलाश कर सकता है।
दिल्ली में हो चुका है मंथन
प्रदेश संगठन में होने वाले इन बड़े बदलावों को लेकर दिल्ली स्तर पर चर्चा का दौर पूरा होने की जानकारी सामने आई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली यात्रा के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ प्रदेश संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी की नियुक्तियों को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है। अब अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व को करना है। माना जा रहा है कि दोनों महत्वपूर्ण पदों पर जल्द ही नाम घोषित किए जा सकते हैं। इन नियुक्तियों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में भाजपा के सामने अब केवल सरकार चलाने की चुनौती नहीं है, बल्कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाए रखने, कार्यकर्ताओं में सक्रियता बनाए रखने और विपक्ष के राजनीतिक अभियान का जवाब देने की भी चुनौती है।
पुराने चेहरों के साथ नए नामों पर भी दांव
प्रदेश मीडिया प्रभारी के लिए सह मीडिया प्रभारी अंशुल तिवारी समेत कुछ पुराने चेहरों के नाम चर्चा में हैं। हालांकि संगठन के भीतर नए नाम पर दांव लगाए जाने की संभावना अधिक मानी जा रही है। भाजपा के लिए मीडिया विभाग का महत्व पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। सोशल मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक विपक्ष के अभियान का जवाब देने के लिए पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए, जो केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित न रहे, बल्कि सरकार और संगठन की राजनीतिक लाइन को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचा सके। इसी वजह से नए मीडिया प्रभारी के चयन में राजनीतिक समझ, संगठन से तालमेल और सरकार के साथ समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस नियुक्ति में संघ की पसंद को भी महत्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
एक साथ बदलेंगे कई चेहरे, नई कार्यशैली का संकेत
मध्यप्रदेश भाजपा में यदि संगठन महामंत्री, प्रदेश प्रभारी और मीडिया प्रभारी के पदों पर एक साथ बदलाव होता है तो इसे प्रदेश संगठन में व्यापक पुनर्संरचना के रूप में देखा जाएगा। तीनों पद पार्टी की संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। संगठन महामंत्री जहां कार्यकर्ता और संगठन के बीच मुख्य कड़ी होता है, वहीं प्रदेश प्रभारी केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश भाजपा के बीच समन्वय का काम करता है। मीडिया प्रभारी सरकार और संगठन के फैसलों को जनता तक पहुंचाने और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इन तीनों पदों पर नए चेहरे आने का मतलब केवल नियुक्तियां करना नहीं होगा, बल्कि प्रदेश भाजपा की कार्यशैली में भी बदलाव का संकेत माना जाएगा।
सत्ता और संगठन के तालमेल पर रहेगा फोकस
मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण संगठन और सत्ता के बीच बेहतर तालमेल केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं में रहेगा। सरकार की योजनाओं को संगठन के जरिए बूथ तक पहुंचाना, कार्यकर्ताओं की नाराजगी को समय रहते दूर करना और संगठन को लगातार चुनावी मोड में बनाए रखना नए पदाधिकारियों की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है। संघ की पृष्ठभूमि वाले संगठन महामंत्री और राष्ट्रीय टीम से आने वाले प्रदेश प्रभारी के साथ यदि नया मीडिया प्रभारी भी नियुक्त किया जाता है तो तीनों के बीच तालमेल प्रदेश भाजपा के लिए अहम होगा। आने वाले दिनों में होने वाली नियुक्तियां इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इनके जरिए केंद्रीय नेतृत्व यह तय करेगा कि मध्यप्रदेश भाजपा अगले चरण में किस तरह की संगठनात्मक शैली के साथ आगे बढ़ेगी। फिलहाल पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा नजर संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी के नाम पर है। इसके बाद मीडिया विभाग में होने वाली नियुक्ति इस बदलाव को पूरा करेगी। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश भाजपा अब संगठन के खाली पद भरने से आगे बढ़कर नई टीम तैयार करने की दिशा में है। संघ की पसंद, केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति और सत्ता-संगठन के संतुलन के बीच होने वाली ये नियुक्तियां आने वाले समय में प्रदेश भाजपा की राजनीतिक दिशा और कार्यशैली पर सीधा असर डाल सकती हैं।

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