मप्र में 15 नई नीतियों का रोडमैप तैयार, नए सेक्टरों पर फोकस

मप्र

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में निवेश का दायरा बढ़ाने और नए सेक्टरों में उद्योग स्थापित करने के लिए सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले करीब 15 नई निवेश नीतियां लाने की तैयारी कर रही है। जनवरी में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन नीतियों को जारी कर सकते हैं। सरकार का फोकस ऐसे क्षेत्रों पर है, जिनमें आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार की संभावनाएं हैं। नई नीतियों के जरिए सरकार निवेशकों को विशेष सुविधाएं, रियायतें और आसान प्रक्रियाएं उपलब्ध कराने की तैयारी में है। प्रस्तावित नीतियों में न्यूक्लियर एनर्जी, इंडस्ट्रियल हाउसिंग, एग्री-प्रोसेसिंग, माइनर मिनरल, मिनरल एक्सप्लोरेशन, क्रिटिकल मिनरल, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। पिछली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सरकार ने करीब 18 नई नीतियां जारी की थीं। सरकार का दावा है कि इन नीतियों के चलते संबंधित क्षेत्रों में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है। इस बार सरकार केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करने के बजाय उन्हें धरातल पर उतारने पर ज्यादा जोर दे रही है।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर निवेश की संभावनाओं और मौजूदा सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि उनके विभाग से जुड़े क्षेत्रों में किस तरह के निवेश की संभावना है और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किन नीतिगत बदलावों की जरूरत है। मुख्य सचिव ने विभागों को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने, नियमों को सरल बनाने, अनावश्यक दंडात्मक प्रावधानों में सुधार करने और सरकारी प्रक्रियाओं को तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही पिछली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आए निवेश प्रस्तावों में आ रही अड़चनों की भी समीक्षा की गई।
हर विभाग से मांगा निवेश का रोडमैप
सरकार अब प्रत्येक विभाग के स्तर पर निवेश का पूरा रोडमैप तैयार कर रही है। इसके लिए विभागों से निवेश संबंधी अवसरों के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत, निवेशकों को दी जाने वाली सुविधाओं और नियमों में संभावित बदलाव की जानकारी मांगी गई है। विभागों से यह भी पूछा गया है कि उद्योग समूहों की ओर से किन सुविधाओं की मांग की जाती है और उन्हें पूरा करने के लिए किस तरह की नई नीति बनाई जा सकती है। अगली बैठक में सभी विभागों को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए अपना विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करना होगा। इसी आधार पर समिट का कार्यक्रम और निवेश क्षेत्रों की प्राथमिकता तय की जाएगी।
30.77 लाख करोड़ के प्रस्ताव, जमीन पर पहुंचे करीब 10 लाख करोड़
पिछली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में करीब 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले थे। अधिकारियों के मुताबिक इनमें से लगभग 10 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव अब तक धरातल पर आ चुके हैं, यानी करीब 33 प्रतिशत प्रस्तावों पर काम आगे बढ़ा है। कुछ निवेशकों को जमीन आवंटित हो चुकी है, जबकि कुछ परियोजनाओं के लिए सरकार और निवेशकों के बीच एग्रीमेंट हो चुका है। बाकी प्रस्तावों को भी जमीन पर उतारने के लिए संबंधित विभागों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

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