150 साल पहले रोजगार के लिए डिग्री नहीं…हुनर जरूरी था

  • ग्लोबल स्किल पार्क में प्रतिवर्ष 10 हजार युवा होंगे प्रशिक्षित: डॉ. यादव

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उद्योग क्षेत्र की आवश्यकताओं के दृष्टिगत संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल पार्क भोपाल आने वाले समय में प्रतिवर्ष 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने का कार्य करेगा। वर्तमान में यह संस्थान प्रतिवर्ष 2 हजार युवाओं को विभिन्न तरह के कौशल पाठ्यक्रमों द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान कर रहा है। वर्ष 2026 में 3 हजार युवा प्रशिक्षित होंगे। यह संख्या निरंतर बढ़ेगी। डॉ यादव, शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में अभिमुखीकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। भोपाल के संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में आयोजित 550 प्रशिक्षुओं के अभिमुखीकरण समारोह (ओरिएंटेशन प्रोग्राम) में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लगभग 150 वर्ष पहले, यानी साल 1857 के आसपास के दौर में भारत में रोजगार के लिए किसी भी तरह की डिग्री की कोई मजबूरी या अनिवार्यता नहीं थी। उस समय लोग अपनी क्षमता, व्यक्तिगत प्रशिक्षण और कौशल (कौशल विकास) के दम पर अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ते थे और आत्मनिर्भर बनते थे। समय के साथ डिग्री को ही रोजगार का मुख्य पैमाना बना दिया गया, जिसने हमारी पारंपरिक भारतीय प्रतिभाओं और हुनर के विकास में एक अदृश्य बाधा खड़ी करने का काम किया।
संत रविदास और श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा: अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के मौके पर इस संस्थान का नाम उनसे जुड़ना सौभाग्य की बात है। संत जी ने सामाजिक कुरीतियों का सामना करते हुए भी अपने हुनर और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। इसके साथ ही सीएम ने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि हम उन्हें उनकी 64 कलाओं और 14 विद्याओं की वजह से याद करते हैं।
बड़ी डिग्रियों के बाद भी युवा बेरोजगार
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल स्किल्स पार्क के शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड की सराहना करते हुए इसे आज के दौर की बहुत बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान समय में देश के कई बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित संस्थानों से भारी-भरकम डिग्रियां हासिल करने के बावजूद अनेक युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और वे बेरोजगार भटक रहे हैं। ऐसे समय में हुनर और प्रशिक्षण पर आधारित यह संस्थान युवाओं के जीवन को एक सही और सुरक्षित दिशा दे रहा है।
एआई का दौर और मानवीय बुद्धि का संतुलन बनाना जरूरी
मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान किया कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से बदलती तकनीक का है। हमें इस दौर में खुद को लगातार अपडेट रखना होगा और नई तकनीकों के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ना होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि परमात्मा ने हमें जो स्वाभाविक बौद्धिक क्षमता दी है, उसका विकास भी जरूरी है। युवाओं को अपनी बुद्धि, हुनर और कड़ी मेहनत के बल पर खुद को दुनिया के सामने सिद्ध करना चाहिए क्योंकि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। भोपाल का संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि देश का सबसे आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र है। इसकी परिकल्पना साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिंगापुर स्थित ‘आईटीईईएस’ भ्रमण से मिली प्रेरणा के बाद की गई थी। साल 2017 में इसकी नींव रखी गई और साल 2019 में सिटी कैंपस से शुरू हुआ यह सफर साल 2024 में 36 एकड़ में फैले मुख्य परिसर तक पहुंच गया।

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