
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल की चर्चित मॉडल-एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में दिल्ली सीबीआई ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और 636 पेज की चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है। सीबीआई की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि त्विषा शर्मा की हत्या नहीं हुई थी, बल्कि उन्होंने आत्महत्या की थी।
वहीं एक और चौंकाने वाली बात ये भी सामने आई है कि घटना वाले दिन यानी 12 मई को दोनों परिवारों के बीच रात में 34 से अधिक कॉल और अन्य संपर्क हुआ था। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने अपनी 11 पन्नों की फाइनल फोरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि की है कि शव पर मारपीट या संघर्ष के कोई निशान नहीं थे, जो किसी भी तरह से हत्या की ओर संकेत करें। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 22 मई के आदेश पर, एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को त्विषा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया था। बोर्ड ने तमाम पहलुओं की बारीकी से जांच करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि यह मामला आत्महत्या का ही है। 10 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई यह रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो गई है।
12 मई की शाम शुरू हुआ कॉल और मैसेज का सिलसिला: सीबीआई के मुताबिक 12 मई की शाम करीब 7:51 बजे ट्विशा ने अपनी ननद रश्मि अबरोल को फोन किया। उसने आरोप लगाया कि समर्थ उस पर 20 लाख रुपये के निवेश को चीनी शेयर बाजार में लगाने के लिए दबाव बना रहा था, जिसे उसने मना कर दिया था। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच रात में 34 से अधिक कॉल और अन्य संपर्क हुए। ट्विशा की मां कथित तौर पर लगातार समर्थ और उसकी मां गिरिबाला से संपर्क कर स्थिति संभालने की कोशिश कर रही थीं। सीबीआई ने मामले की तह तक जाने के लिए लगभग 150 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं।
साजिश नहीं, प्रताडऩा का नतीजा
भले ही जांच एजेंसी ने हत्या के आरोपों को खारिज कर दिया हो, लेकिन सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में त्विषा की सास, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और पति अधिवक्ता समर्थ सिंह को दोषी माना है। सीबीआई की जांच में यह सिद्ध हुआ है कि ससुराल पक्ष द्वारा की गई दहेज प्रताडऩा ही त्विषा की मौत का मुख्य कारण बनी। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा धारा 80 (2) यानी दहेज हत्या, धारा 85 यानी पति या रिश्तेदारों द्वारा महिला के साथ क्रूरता, धारा 108 यानी आत्महत्या के लिए उकसाना और धारा 3 (5) यानी दहेज का लेनदेन के अलावा, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत प्रकरण में चालान प्रस्तुत किया है।
