
बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मुस्लिम निकाह और तलाक से जुड़े केस में कहा-किसी भी धार्मिक संस्था या दारुल इफ्ता के फतवे के आधार पर तलाक की कानूनी घोषणा नहीं कराई जा सकती। फतवा केवल धार्मिक राय या मार्गदर्शन हो सकता है। उससे निकाह अपने आप समाप्त नहीं माना जाएगा। निकाह खत्म करने का फैसला केवल कानून के तहत कोर्ट करेगा। हाईकोर्ट ने भोपाल के पति-पत्नी से जुड़े मामले में पति की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने पति को कानून के अनुसार परिवार न्यायालय में नए सिरे से तलाक की याचिका दायर करने की छूट दी। साथ ही स्पष्ट किया कि मुस्लिम पुरुष भी परिवार न्यायालय में तलाक की याचिका दायर कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था, दारुल इफ्ता या सेमिनरी का फतवा तलाक का कानूनी आधार नहीं बन सकता। केवल फतवे के आधार पर परिवार न्यायालय से विवाह विच्छेद की घोषणा की डिक्री हासिल नहीं की जा सकती।
