प्राइवेट सेंटरों में मुफ्त होगी गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी

महिलाओं की सोनोग्राफी
  • मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए एमपी सरकार का बड़ा कदम

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु की उच्च जोखिम स्थिति का समय पर पता लगाने के लिए भोपाल में अब निजी स्वास्थ्य संस्थाओं में भी नि:शुल्क सोनोग्राफी सुविधा और अधिक सुगम हो गई है। इसके लिए डिजिटल कैशलेस पेमेंट सिस्टम शुरू किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा निजी क्षेत्र के सोनोलॉजिस्ट और संबंधित स्वास्थ्य संस्थाओं को नई प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में ई-वाउचर जनरेट करने, रिकॉर्ड संधारण, अप्रूवल प्रोसेस और भुगतान प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
सोनोलॉजिस्ट को होगा कैशलेस भुगतान: डिजिटल कैशलेस पेमेंट सिस्टम से सोनोलॉजिस्ट को मानदेय देने की प्रक्रिया भी आसान हो गई है। निजी स्वास्थ्य संस्था द्वारा जांच करने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  ‘स्पर्श पोर्टल’ के माध्यम से प्रति केस 500 रुपए का भुगतान सीधे सोनोलॉजिस्ट को करेगा। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि सुमन यूएसजी पोर्टल पर गर्भवती की सोनोग्राफी की स्पेशल फाइंडिंग्स भी उपलब्ध होंगी। इससे डॉक्टरों को गर्भावस्था के जोखिमों की जानकारी लेने और त्वरित उपचार शुरू करने में आसानी होगी।
निरामय अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन सील: गर्भधारण पूर्व और प्रसूति पूर्व निदान तकनीकी (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम के उल्लंघन पर सीएमएचओ भोपाल एवं समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एक्ट द्वारा निरामय अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन को सील किया गया है। अस्पताल संचालक डॉ.अखिलेश मोहन लहरी एवं रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ मिश्रा को नोटिस जारी कर दोनों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर किया जा रहा है। सीएमएचओ कार्यालय की टीम द्वारा किए गए नियमित निरीक्षण के दौरान फॉर्म एफ में गंभीर अनियमितता मिली थीं। फॉर्म में कुछ गर्भवती महिलाओं की प्रविष्टी मिली लेकिन एएनसी रजिस्टर में उनकी प्रविष्टि नहीं की गई।
कैसे मिलेगी सुविधा
जिन जिला चिकित्सालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में शासकीय सोनोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं या वे लंबे अवकाश पर हैं, वहां से गर्भवती महिलाओं को अब निजी सोनोग्राफी सेंटर में रेफर किया जा सकेगा। यह व्यवस्था एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत चिन्हित सभी स्वास्थ्य संस्थाओं पर लागू होगी। शासकीय स्वास्थ्य संस्था की स्त्री रोग विशेषज्ञ, पीजीएमओ या मेडिकल ऑफिसर ओपीडी में परीक्षण के बाद सोनोग्राफी की सलाह देंगे। आपातकालीन और इंटीकेटेड केस में अधिकतम दो बार सोनोग्राफी की सलाह दी जा सकेगी। सलाह मिलने के बाद संस्था द्वारा ‘सुमन यूएसजी पोर्टल’ पर गर्भवती महिला के लिए ई-वाउचर बनाया जाएगा। ई-वाउचर अप्रूव होते ही महिला के मोबाइल पर एसएमएस आएगा। महिला इस ई-वाउचर के जरिए 7 दिनों के भीतर किसी भी अधिकृत निजी सोनोग्राफी सेंटर में जाकर नि:शुल्क जांच करवा सकेगी।
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को लंबी कतारों और देरी से बचाते हुए त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध कराना है। निजी क्षेत्र के सहयोग से जांच की पहुंच बढ़ेगी और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।प्रशिक्षण में भोपाल जिले के निजी सोनोलॉजी सेंटरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने उनसे समय पर रिपोर्ट अपलोड करने और महिला हितैषी व्यवहार रखने की अपील की।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और भुगतान में होने वाली देरी भी खत्म होगी।

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