सीजेआई से अभद्र भाषा बोलने वाले को जमानत, कहा-हिरासत अनुचित

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने, कोर्ट रूम में कागजात फेंकने, सुरक्षा कर्मी से मारपीट करने और कार्यवाही बाधित करने के आरोप में गिरफ्तार दो विवि के छात्रों को कोर्ट ने जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों का आचरण किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है और इसकी स्पष्ट शब्दों में निंदा की जाती है, लेकिन केवल आरोपों की गंभीर भाषा के आधार पर उन्हें अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। पटियाला हाउस स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संवैधानिक संस्था किसी एक आक्रोशित और स्वयं पैरवी कर रहे वादी के असंयमित व्यवहार से कमजोर नहीं पड़ती। ऐसे में अधीनस्थ अदालतों को भी जमानत पर विचार करते समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदर्शित संस्थागत संयम का अनुसरण करना चाहिए। अदालत ने इटावा निवासी और लखनऊ विवि के तृतीय वर्ष के कानून के छात्र प्रबल प्रताप सिंह, रायबरेली निवासी द्वितीय वर्ष के छात्र चंदर भान की जमानत याचिकाएं मंजूर कीं। दोनों को 25-25 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया।

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