
- 20 विभागों के 50 हजार कर्मचारियों को मिला लाभ, चार लाख अब भी इंतजार में
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में करीब एक दशक बाद शुरू हुई सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया अभी भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। राज्य सरकार ने सभी विभागों को 31 जुलाई तक पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब तक 54 में से केवल करीब 20 विभागों में ही प्रक्रिया पूरी हो पाई है। इन विभागों में लगभग 50 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है, जबकि चार लाख से अधिक कर्मचारी अभी भी अपने प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अनुसार जिन विभागों में पदोन्नति पूरी हो चुकी है, उनसे ऑनलाइन जानकारी प्राप्त हो गई है। शेष विभागों की रिपोर्ट अगस्त के पहले सप्ताह तक मिलने की संभावना है। अब तक सबसे ज्यादा पदोन्नति गृह विभाग में हुई है। विभागीय जानकारी के अनुसार लगभग 15 हजार से 20 हजार पुलिसकर्मियों और कार्यवाहक अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। इनमें बड़ी संख्या में निरीक्षकों को उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर पदोन्नत किया गया है। इसके अलावा राजस्व विभाग में पदोन्नतियां हुई हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में 217 कर्मचारियों को अधीक्षक, सहायक और अन्य पदों पर पदोन्नति मिली। नगर निगम, मंत्रालय और उच्च शिक्षा विभाग में भी पदोन्नति आदेश जारी किए गए। स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नति दी गई है।
31 जुलाई तक पूरी करनी है प्रक्रिया
जीएडी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि 31 जुलाई तक विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्रवाई पूरी कर रिक्त पदों की जानकारी भी भेजी जाए। हालांकि अब तक केवल लगभग 20 विभागों की रिपोर्ट ही मुख्यालय पहुंची है। बाकी विभागों में प्रक्रिया अभी जारी है।
स्कूल शिक्षा विभाग सबसे पीछे
पदोन्नति प्रक्रिया में सबसे अधिक देरी स्कूल शिक्षा विभाग में देखने को मिल रही है। 26 जुलाई तक की स्थिति के अनुसार केवल करीब एक हजार शिक्षक एवं कर्मचारी पदोन्नत हो सके हैं। जबकि 50 हजार से अधिक नए शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति लंबित है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि समय पर डीपीसी नहीं होने से हजारों शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।
शिक्षक संगठन ने जताई नाराजगी
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को जुलाई के अंत तक पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग अब तक नए शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति पूरी नहीं कर पाया है। उनके अनुसार समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
कर्मचारी संघ ने मांगी समय सीमा बढ़ाने की मांग
तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने पदोन्नति में हो रही देरी के लिए विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि चार लाख से अधिक पात्र कर्मचारियों में से अभी केवल 10 से 12 प्रतिशत को ही पदोन्नति मिल सकी है। अंतिम तिथि में केवल कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में सरकार को 31 जुलाई की समय सीमा बढ़ानी चाहिए, ताकि सभी पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सके।
