- 4 हजार कर्मचारियों के प्रमोशान के आदेश जारी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश पुलिस में करीब एक दशक से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढऩे लगी है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के सख्त अल्टीमेटम का असर अब प्रदेशभर में साफ दिखाई देने लगा है। अधिकांश जिलों और पुलिस रेंजों ने आरक्षक से प्रधान आरक्षक तथा प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) तक के प्रमोशन आदेश जारी कर दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कई आदेश 11 जुलाई की बैक डेट में जारी किए गए। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम तक प्रदेश के करीब 36 जिलों और विभिन्न रेंजों में लगभग 4,000 पुलिसकर्मियों के पदोन्नति आदेश जारी किए जा चुके थे। इसके साथ ही पीएचक्यू की कई शाखाओं में कार्यरत पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और लिपिकीय स्टाफ की भी प्रमोशन सूची जारी कर दी गई।
गत दिवस डीजीपी कैलाश मकवाणा ने सभी आईजी, डीआईजी और जिला पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि दो दिनों के भीतर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कर सूची जारी की जाए। इसके बाद पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक लगातार बैठकें हुईं और लंबित फाइलों का तेजी से निपटारा किया गया। सूत्रों का कहना है कि कई जिलों में प्रक्रिया पहले से तैयार थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से आदेश जारी नहीं हो पा रहे थे। डीजीपी के निर्देश के बाद सभी इकाइयों ने प्राथमिकता के आधार पर आदेश जारी किए।
16 हजार पुलिसकर्मियों को मिलेगा लाभ
वर्ष 2016 में पदोन्नति प्रक्रिया रुकने के बाद से हजारों पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपने प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे। अब विभागीय प्रक्रिया पूरी होने पर करीब 16 हजार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलने की संभावना है। फिलहाल आरक्षक से प्रधान आरक्षक और प्रधान आरक्षक से एएसआई तक की सूची अधिकांश स्थानों पर जारी हो चुकी है, जबकि एएसआई से एसआई और एसआई से निरीक्षक पदोन्नति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
जांच और कोर्ट केस बने देरी की वजह
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच या न्यायालयीन प्रकरण लंबित होने के कारण उनकी पदोन्नति सूची अभी रोकी गई है। ऐसे मामलों की अलग-अलग समीक्षा की जा रही है ताकि नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जा सके। इधर सूबेदार से रक्षित निरीक्षक पद पर पदोन्नति के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इससे लंबे समय से कार्यवाहक पद पर कार्य कर रहे अधिकारियों को नियमित पदोन्नति मिल गई है और उनके पदनाम के आगे से ‘कार्यवाहक’ शब्द हट जाएगा।
आबकारी विभाग में भी 10 साल बाद प्रमोशन
केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश आबकारी विभाग में भी एक दशक बाद पदोन्नति का रास्ता खुल गया है। सोमवार को विभाग ने 9 कैडर के 533 कर्मचारियों के प्रमोशन आदेश जारी किए। इनमें 38 मुख्य आरक्षक उपनिरीक्षक बने, 279 आरक्षक मुख्य आरक्षक पद पर पदोन्नत हुए, 7 मुख्य लिपिक सहायक अधीक्षक बने, 3 स्टेनोग्राफर ग्रेड-3 को ग्रेड-2 में पदोन्नति मिली, 71 सहायक ग्रेड-3 को सहायक ग्रेड-2 बनाया गया, 42 लेखापाल मुख्य लिपिक बने, 42 भृत्य सहायक ग्रेड-3 पद पर पदोन्नत हुए, 60 भृत्य दफ्तरी बने और 1 दफ्तरी को सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति दी गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार अगले दो दिनों में उपनिरीक्षक से एडीईओ, एडीईओ से डीईओ, डीईओ से सहायक आयुक्त तथा सहायक आयुक्त से उपायुक्त पदों की पदोन्नति सूची भी जारी होने की संभावना है।
लंबे इंतजार का अंत
करीब दस वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। कर्मचारियों का मानना है कि इससे न केवल उनके करियर को गति मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक प्रभावी होगी। अब सभी की नजर इस सप्ताह जारी होने वाली शेष पदोन्नति सूचियों पर टिकी है, जिनसे हजारों कर्मचारियों को लंबे इंतजार के बाद राहत मिलने की उम्मीद है।
