
- 15 साल के अनुबंध, अतिरिक्त कब्जे और मंजूरी प्रक्रिया पर उठे सवाल, ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल स्थित रेडक्रॉस अस्पताल परिसर में संचालित सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। रेडक्रॉस सोसायटी की नवगठित कार्यकारिणी द्वारा कराए गए निरीक्षण और जांच में अस्पताल प्रबंधन पर अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन, अतिरिक्त भूमि पर कब्जे और बिना स्वीकृति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के आरोप लगाए गए हैं।
मामले की जांच के लिए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में आवेदन भी दिया गया है। रेडक्रॉस सोसायटी मध्यप्रदेश के चेयरमैन ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और विधिक सलाह के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 9 फरवरी 2026 को रेडक्रॉस की नई कार्यकारिणी के निर्देश पर चार सदस्यीय टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इसके बाद 38 पृष्ठों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिद्धांता हॉस्पिटल को 24 हजार वर्गफुट क्षेत्र उपयोग की अनुमति दी गई थी, लेकिन वर्तमान में लगभग 27,500 वर्गफुट क्षेत्र का उपयोग किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल परिसर में अनुबंध में स्वीकृत सेवाओं के अलावा 17 से अधिक अतिरिक्त व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
मंजूरी के बिना 15 साल के लिए सौंपा गया अस्पताल
जांच समिति ने सबसे गंभीर सवाल अस्पताल को निजी कंपनी को 15 वर्षों के लिए सौंपने की प्रक्रिया पर उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह का निर्णय लेने के लिए रेडक्रॉस की प्रबंध समिति की विधिवत मंजूरी आवश्यक थी, लेकिन ऐसी स्वीकृति नहीं ली गई। रिपोर्ट में उल्लेख है कि बाद में रिकॉर्ड में यह दर्ज किया गया कि राज्यपाल (रेडक्रॉस राज्य शाखा के अध्यक्ष) से बैठक का समय नहीं मिल पाने के कारण प्रबंध समिति की बैठक आयोजित नहीं हो सकी।
2012 से 2015 तक कैसे बदली प्रक्रिया
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2012 में केवल एमआरआई, सीटी स्कैन और कैथलैब जैसी विशेष सेवाओं के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। वर्ष 2013 में प्रक्रिया बदलकर पूरे अस्पताल को निजी कंपनी को सौंपने की दिशा में कदम बढ़ाए गए। 2014 में राज्यपाल सचिवालय की आपत्तियों के बावजूद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। भोपाल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड को अस्पताल सौंपने का निर्णय वित्तीय और कार्यकारिणी समिति स्तर पर लिया गया। 29 मार्च 2015 को 15 वर्ष के लिए अनुबंध किया गया, जिसके तहत रेडक्रॉस को 10.50 लाख रुपये प्रतिमाह भुगतान की शर्त रखी गई। रेडक्रॉस की जांच रिपोर्ट के बाद मामला कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर होता दिखाई दे रहा है। यदि ईओडब्ल्यू जांच शुरू होती है तो अस्पताल के आवंटन, अनुबंध प्रक्रिया, भूमि उपयोग और वित्तीय पहलुओं की विस्तृत जांच हो सकती है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।
अनुबंध में क्या था, क्या चल रहा है
जानकारी के अनुसार, अनुबंध में 11 सेवाएं स्वीकृत हैं। इनमें कैथलैब एवं कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, सीटी स्कैन, गैस्ट्रो मेडिसिन, गैस्ट्रो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, इंटेंसिव केयर, मोटापा सर्जरी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी,सर्जिकल ऑन्कोलॉजी आदि। जबकि आरोप है कि उपरोक्त के अलावा नेत्र रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, हड्डी रोग, ईएनटी, प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जरी, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, मनोरोग विभाग, पल्मोनोलॉजी, एंडोस्कोपी, फिजियोथैरेपी, पैथोलॉजी, डायलिसिस और ऑर्गन ट्रांसप्लांट सहित अन्य सेवाएं भी शुरू कर ली गई हैं। हालांकि सिद्धांता हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सुबोध वाष्र्णेय ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि अस्पताल द्वारा कोई अतिरिक्त स्थायी निर्माण नहीं किया गया है तथा सभी आवश्यक अनुमतियां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) और चिकित्सा शिक्षा विभाग से प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रबंध समिति की मंजूरी से जुड़ा कोई विवाद है तो उसमें अस्पताल की कोई भूमिका नहीं है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट संबंधी अनुमतियां भी संबंधित सक्षम प्राधिकरणों से ली गई हैं। वहीं रेडक्रॉस सोसायटी के तत्कालीन चेयरमैन मुकेश नायक ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अनुबंध से पहले आवश्यक अनुमति ली गई थी।
