
- चुनावी मैदान में भाजपा का मुकाबला कैसे कर पाएगी कांग्रेस
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में कांग्रेस ने चुनावी मैदान में भाजपा से मुकाबला करने के लिए कई योजनाओं की प्लानिंग की, लेकिन लगभग सभी अधर में लटक में हैं। पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए अप्रैल में जिन बड़े अभियानों का ऐलान किया था, वे दो महीने बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। घर-घर जाकर जनता से संपर्क और सहयोग निधि जुटाने की योजना हो या एक हजार से अधिक ब्लॉकों में जन संवाद सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य, दोनों ही अभियान फाइलों से बाहर नहीं निकल सके। इतना ही नहीं, चार महीने से खाली पड़े प्रवक्ता पदों पर नियुक्तियां भी अब तक नहीं हो सकी हैं। इससे प्रदेश कांग्रेस की संगठनात्मक सक्रियता और कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रदेश कांग्रेस ने अप्रैल में फैसला लिया था कि 25 मई से 25 जून तक प्रदेश के एक हजार से अधिक ब्लॉकों में जन संवाद सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। उद्देश्य था कार्यकर्ताओं और जनता के बीच संवाद बढ़ाना तथा संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करना। शुरुआत में गर्मी का हवाला देकर कार्यक्रम जून में टाल दिया गया, लेकिन जून का दूसरा पखवाड़ा भी गुजर रहा है और अधिकांश ब्लॉकों में सम्मेलन आयोजित नहीं हो सके। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विवाद में पूरा संगठन उलझ गया, जिससे अन्य कार्यक्रमों पर ध्यान ही नहीं दिया गया।
घर-घर चलो अभियान भी शुरू नहीं
कांग्रेस ने जून से घर-घर चलो अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इसके तहत कार्यकर्ताओं को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 30 हजार परिवारों तक पहुंचना था। परिवारों से संपर्क कर उनकी समस्याएं सुनने के साथ-साथ 100 रुपए की सहयोग निधि भी एकत्रित की जानी थी। पार्टी का दावा था कि इस निधि का उपयोग जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठन को मजबूत करने तथा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किया जाएगा। लेकिन अभियान की शुरुआत तक नहीं हो पाई। न कार्यकर्ताओं को कोई स्पष्ट कार्यक्रम मिला और न ही जनता तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू हो सकी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह अभियान केवल जनसंपर्क नहीं बल्कि संगठन की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम था। यदि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पूरा होता तो पार्टी को करोड़ों रुपए की सहयोग राशि प्राप्त हो सकती थी। लेकिन अभियान शुरू न होने से संगठनात्मक और आर्थिक दोनों उद्देश्य अधूरे रह गए।
चार महीने से प्रवक्ता विहीन कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस में फरवरी से नए प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं हो सकी है। पार्टी पुराने प्रवक्ताओं के सहारे मीडिया प्रबंधन कर रही है। नए चेहरों की तलाश के लिए कांग्रेस ने टैलेंट हंट कार्यक्रम चलाया था। दो चरणों की प्रक्रिया के बाद 13 मई को अंतिम इंटरव्यू भी हो गए थे। पार्टी नेताओं ने मई के अंत तक नई सूची जारी करने का दावा किया था, लेकिन जून समाप्ति की ओर है और अब तक कोई घोषणा नहीं हुई। इससे मीडिया और प्रचार तंत्र में भी अनिश्चितता बनी हुई है।
टैलेंट हंट भी राजनीति की भेंट चढ़ा
कांग्रेस के मीडिया विभाग ने प्रदेश, संभाग और जिला स्तर पर प्रवक्ता, रिसर्च एवं पब्लिसिटी कोऑर्डिनेटर चुनने के लिए टैलेंट हंट आयोजित किया था। लेकिन पहले कार्यक्रम की प्रक्रिया में देरी हुई और बाद में शीर्ष नेतृत्व राज्यसभा चुनाव की व्यस्तताओं में उलझ गया। परिणामस्वरूप चयनित उम्मीदवार अब भी अंतिम सूची का इंतजार कर रहे हैं। लगातार टल रहे कार्यक्रमों ने प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक नेतृत्व की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी एक ओर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है, वहीं दूसरी ओर अपने घोषित कार्यक्रमों को ही समय पर लागू नहीं कर पा रही।
राजनीतिक संदेश भी प्रभावित
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी तैयारी केवल बड़े आंदोलनों या प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं होती, बल्कि बूथ और ब्लॉक स्तर की सक्रियता से होती है। जन संवाद सम्मेलन, घर-घर संपर्क अभियान और नए प्रवक्ताओं की नियुक्ति जैसे कदम संगठन को ऊर्जा देने वाले थे। इनकी देरी से कार्यकर्ताओं में भी निराशा का माहौल बन सकता है। प्रदेश कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल भाजपा से मुकाबला नहीं, बल्कि अपने घोषित कार्यक्रमों को जमीन पर उतारकर कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखना भी है।
