
- भोपाल की आदमपुर खंती में साढ़े सात लाख टन कचरा जमा
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश के 35 शहर पुराने कचरे (लेगेसी वेस्ट) से परेशान हैं। इस कचरे की कुल मात्रा 73 लाख टन है। जनवरी 2026 तक इसे डिस्पोजल करना था, लेकिन डेडलाइन निकलने के बाद भी काम अधूरा है। इसको लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। उधर, पुराने कचरे की सबसे ज्यादा मात्रा भोपाल में उपलब्ध है। राजधानी की आदमपुर लैंडफिल साइट में लगभग 7.5 लाख टन पुराना कचरा जमा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अनुसार अभी 109 शहरों में पुराने कचरे को हटाने का काम चल रहा है। इनमें से 74 शहरों ने यूएडीडी को रिपोर्ट दी है कि उनके यहां निष्पादन का काम जारी है, लेकिन 35 शहर ऐसे भी हैं, जो पुराने कचरे को हटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालियर के तीन निकायों में 14.74 लाख टन से ज्यादा पुराना कचरा था। जिसमें से अब लगभग 53 हजार टन बचा है। यानी निष्पादन में ग्वालियर के तीनों निकायों ने बेहतर काम किया। इसी तरह गुना जिले के दो निकायों में लगभग 96 हजार टन और अशोकनगर के दो निकायों में 95 हजार टन पुराना कचरा अभी भी हटाया जाना बाकी है।
इन शहरों में सबसे ज्यादा लेगेसी वेस्ट
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की सूची में प्रदेश के गुना, अशोकनगर, ग्वालियर, बुरहानपुर, रतलाम और सिवनी ऐसी निकाय हैं, जहां सबसे ज्यादा लेगेसी वेस्ट मौजूद है। हालांकि इनमें से पुराने कचरे के निष्पादन के बाद 688 एकड़ जमीन वापस ली गई, लेकिन कचरे के पहाड़ अभी भी 200 एकड़ जमीन पर मौजूद हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि प्रदेश में 173 लैंडफिल साइट्स पर लगभग 73 लाख टन पुराना कचरा जमा हो गया था, जो लगभग 888 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है। इन जगहों को साफ करने की कोशिशों से करीब यह 688 एकड़ जमीन क्लीयर हुई है।
इनका कहना है
प्रदेश के 109 शहरी निकायों में पुराने कचरे को हटाने का काम चल रहा है। कमियों की पहचान कर ली गई है और ठेकेदारों को तय समय में काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है। बचा हुआ पुराना कचरा हटाने का काम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।
शिशिर गेमावत, एडिशनल कमिश्नर, स्वच्छ भारत मिशन
