- तबादला अवधि समाप्त होने के बाद अब स्थानांतरण आदेशों को लेकर शिकायतों का दौर शुरू
- गौरव चौहान

प्रदेश में तबादला अवधि समाप्त होने के बाद अब स्थानांतरण आदेशों को लेकर शिकायतों का दौर शुरू हो गया है। विभिन्न विभागों से तबादला नीति के उल्लंघन की शिकायतें शासन तक पहुंच रही हैं। सबसे अधिक आपत्तियां वाणिज्यिक कर विभाग और जनजातीय कार्य विभाग से सामने आई हैं, जहां एक ही पद पर दो-दो अधिकारियों की पदस्थापना, रिक्त पदों को खाली छोडऩे और विशेष श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जैसे मामले उजागर हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई स्थानांतरण आदेशों में शासन की निर्धारित तबादला नीति का पालन नहीं किया गया। इसके चलते प्रभावित कर्मचारी और अधिकारी सूची में संशोधन की मांग कर रहे हैं। शासन स्तर पर इन शिकायतों की जांच शुरू कर दी गई है। नई तबादला नीति के अनुसार जिन कर्मचारियों या अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम समय शेष है, उनका तबादला नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद वाणिज्यिक कर विभाग में ऐसे मामलों की शिकायतें सामने आई हैं। भोपाल सर्कल-4 में पदस्थ बृहस्पति सिंह के सेवानिवृत्त होने में मात्र चार महीने शेष हैं, फिर भी उनका तबादला नौगांव कर दिया गया। इसे नीति के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
एक पद पर दो अधिकारियों की पोस्टिंग
वाणिज्यिक कर विभाग में पदस्थापना की गड़बडिय़ां सामने आई हैं। भोपाल डिवीजन-2 में सीटीओ के एक पद पर दो अधिकारियों की पदस्थापना कर दी गई। इंदौर से स्थानांतरित संतोष कतरौलिया को यहां भेजा गया, जबकि उसी पद पर प्रियंका पटेल पहले से कार्यरत हैं। भोपाल सर्कल-6 में दो सीटीओ पद पहले से भरे हुए थे, लेकिन तीसरी अधिकारी ऋतु रावत की भी पदस्थापना कर दी गई।
कहीं पद खाली, कहीं दोहरी नियुक्ति
बैतूल में सीटीओ अशोक आमों का तबादला ग्वालियर कर दिया गया, लेकिन उनके स्थान पर किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। इससे पूरा सर्कल बिना सीटीओ के संचालित होने की स्थिति में पहुंच गया है। ग्वालियर डिवीजन-1 के ज्वाइंट कमिश्नर अनुराग पाठक और डिवीजन-2 के ज्वाइंट कमिश्नर अतुल श्रीवास्तव दोनों का तबादला इंदौर कर दिया गया। वहीं इंदौर से स्थानांतरित मधुलिका सिंह को दोनों पदों का प्रभार सौंप दिया गया, जिससे प्रशासनिक असंतुलन की स्थिति बन गई है।
गंभीर बीमारी के बावजूद तबादले
बैतूल में पदस्थ टैक्स इंस्पेक्टर नमन जैन ने अपनी माता के कैंसर उपचार का हवाला देते हुए तबादला न करने का आवेदन दिया था। इसके बावजूद उनका स्थानांतरण दूसरे जिले में कर दिया गया। जबकि तबादला नीति में गंभीर बीमारी से पीडि़त कर्मचारी या उसके निकट परिजन की स्थिति में विशेष छूट का प्रावधान है। इसके अलावा सिंगल मदर, विधवा, परित्यक्ता और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों के तबादलों की शिकायतें भी विभिन्न विभागों से प्राप्त हुई हैं।
जनगणना ड्यूटी वाले शिक्षकों के तबादले
जनजातीय कार्य विभाग में जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों के भी तबादले कर दिए गए हैं। जबकि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही निर्देश जारी कर चुकी हैं कि मार्च 2027 तक जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे तबादले नियमों के विरुद्ध हैं और इन्हें निरस्त माना जाएगा।
स्थापना शाखा की भूमिका पर सवाल
तबादलों में सामने आई विसंगतियों के बाद संबंधित विभागों की स्थापना शाखाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शासन स्तर पर यह जांच की जा रही है कि क्या पदों की उपलब्धता, नीति प्रावधानों और विशेष श्रेणी के मामलों का सही परीक्षण किए बिना स्थानांतरण आदेश जारी किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन त्रुटियों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो वाणिज्यिक कर विभाग के राजस्व कार्यों और जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आज से शिक्षकों के तबादले
स्कूल शिक्षा विभाग में स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू होने जा रही है, लेकिन विभाग द्वारा निर्धारित शर्तों को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्तमान नियम इतने कठोर हैं कि प्रदेश के अधिकांश शिक्षक स्वैच्छिक तबादले का लाभ नहीं ले पाएंगे। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति में संशोधन की मांग की है। उनका कहना है कि 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता, जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों के स्थानांतरण पर रोक और न्यूनतम तीन वर्ष की सेवा अवधि जैसी शर्तें हजारों शिक्षकों के लिए बाधा बन रही हैं। बता दें कि मप्र में 3.50 लाख शिक्षक हैं। कौशल ने बताया कि प्रदेश के कई शिक्षक पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से लंबे समय से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन ई-अटेंडेंस से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण कई शिक्षकों की उपस्थिति रिकॉर्ड प्रभावित हुई है, जिसका असर अब उनके स्थानांतरण आवेदन पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना कार्य में भी संलग्न हैं। ऐसे शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रखने का निर्णय उनके लिए अन्यायपूर्ण साबित हो सकता है।
