जेपी में एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम शुरू

एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट
  • निर्माण के समय एसटीपी और ईटीपी बनाना भूल गए थे जिम्मेदार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। जयप्रकाश अस्पताल में 2.25 करोड़ रुपए की लागत से ईटीपी (एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने का काम शुरू हुआ है। इसके लिए शासन ने बजट स्वीकृत कर दिया है। ईटीपी के साथ अस्पताल परिसर में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण भी किया जाएगा। इसी के साथ दो बिल्डिगों को जोडऩे के लिए बीच में एक कॉरीडोर भी बनाया जाएगा।
ईटीपी के लिए जहां 2.25 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। वहीं शेष कामों के लिए करीब पांच करोड़ रुपए का बजट मुहैया कराया गया है। जब सभी काम हो जाएंगे उसके बाद पीडब्ल्यूडी नई बिल्डिंग को अस्पताल प्रबंधन के हैंडओवर करेगा।
बिल्डिंग का काम पूरा पर इस्तेमाल नहीं
जेपी परिसर में 240 बिस्तर की सुविधा के साथ पांच मंजिला इमारत तैयार है, लेकिन इस्तेमाल अभी तक शुरू नहीं हुआ है। जानकारी अनुसार अगस्त 2025 में इस भवन का हैंडओवर पीडब्ल्यूडी द्वारा जेपी अस्पताल सिविल सर्जन को किया जाना था। लगभग इसकी तैयारियां भी पूरी हो गई थीं। लेकिन अधूरे कामों के चलते हैंड ओवर की प्रक्रिया को टाल दिया गया। एटीपी का मतलब एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट होता है, जो गंदे पानी (अपशिष्ट जल) को पर्यावरण में छोडऩे से पहले साफ करने और उपचारित करने की एक प्रणाली है, ताकि प्रदूषक और हानिकारक पदार्थ हट जाएं और पानी सुरक्षित हो सके, खासकर उद्योगों जैसे कपड़ा, रसायन, और खाद्य उद्योगों में इसका बहुत इस्तेमाल होता है। यह पानी से ठोस, घुलनशील और जहरीले पदार्थों को हटाता है। अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट और मरीजों के संक्रमण के कारण यहां से निकलने वाला पानी बेहद दूषित होता है। जिसे एटीपी द्वारा साफ करना अति आवश्यक होता है।
एसटीपी क्या होता है
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एक सुविधा है जो गंदे पानी (सीवेज) को शारीरिक, रासायनिक और जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग करके उपचारित करती है, ताकि दूषित पदार्थों और सूक्ष्मजीवों को हटाकर पानी को सुरक्षित रूप से पर्यावरण में छोड़ा जा सके या सिंचाई जैसे अन्य कामों के लिए पुन: उपयोग किया जा सके, जिससे जल प्रदूषण और बीमारियों का प्रसार रोका जा सके।
बिल्डिंग की डिजाइन में शुरू से प्रावधान नहीं: अधिकारियों से जानकारी मिली है कि पांच मंजिला इमारत की जब डिजाइन तैयार की गई थी, उस समय इसमें एसटीपी और ईटीपी का प्रावधान नहीं था। इसके पीछे कारण यह बताया गया कि बिल्डिंग पहले नाले के करीब बनाई जा रही थी। सीवेज को सीधे नाले में मौजूद सीवेज लाइन में जोडऩे की प्लानिंग थी। लेकिन बाद में डिजाइन बदल दी गई और बिल्डिंग नए स्थान पर निर्मित की गई।
मरीजों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना
नई बिल्डिंग में पांच फ्लोर हैं। कुल 240 बिस्तर की क्षमता यहां हैं। यदि समय से यह हैंडओवर हो जाती तो आज जेपी अस्पताल 500 बिस्तरों से ज्यादा के साथ संचालित हो रहा होता। नई बिल्डिंग में मॉडयूलर आपरेशन थियेटर, आईसीयू और कई आधुनिक सुविधाएं हैं। लेकिन जब यह बिल्डिंग अस्पताल को सुपुर्द नहीं होती, इसका फायदा मरीजों को नहीं मिलेगा।
कुछ काम बाकी हैं: सरकार ने ईटीपी के लिए 2 करोड़ रुपए से अधिक का बजट दिया है। हमने पीआईयू को काम पूरा करने के लिए 3 महीने का समय दिया है। इसके बाद हैंडओवर की प्रक्रिया करेंगे।

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