- प्रदेश में पदोन्नति रुकने से गड़बड़ाया प्रशासनिक ढांचा, राज्य प्रशासनिक सेवा के आधे पद खाली
- गौरव चौहान

मध्य प्रदेश में तहसीलदारों और जिला भू-अभिलेख अधिकारियों को पदोन्नति देकर राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे) में शामिल नहीं किए जाने से प्रशासनिक ढांचे में गंभीर असंतुलन पैदा हो गया है। पिछले लगभग एक दशक से पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने के कारण राज्य प्रशासनिक सेवा के स्वीकृत पदों में से करीब आधे पद खाली पड़े हैं, जिससे जिलों और मंत्रालय स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
वर्तमान में राज्य प्रशासनिक सेवा के 973 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 482 अधिकारी ही कार्यरत हैं। सेवा नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और शेष 50 प्रतिशत पद तहसीलदारों एवं भू-अभिलेख अधिकारियों की पदोन्नति से भरे जाने हैं, लेकिन पदोन्नति नहीं होने से बड़ी संख्या में पद रिक्त बने हुए हैं। प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने करीब 300 तहसीलदारों को प्रभारी डिप्टी कलेक्टर का दायित्व सौंप रखा है। हालांकि उन्हें नियमित रूप से राज्य प्रशासनिक सेवा में शामिल नहीं किया गया है। इसके चलते वे ग्रेडेशन सूची में स्थान पाने और वरिष्ठता संबंधी लाभों से वंचित हैं। कई अधिकारी वर्षों से उच्च जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें पदोन्नति का वैधानिक लाभ नहीं मिल पा रहा।
20 जिलों में एडीएम पद रिक्त
अधिकारियों की कमी का असर जिलों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। प्रदेश के लगभग 20 जिलों में अपर कलेक्टर (एडीएम) के पद खाली हैं। इनमें जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, सीहोर, शाजापुर, बड़वानी, बुरहानपुर, ग्वालियर, छतरपुर, निवाड़ी, इंदौर, विदिशा, रायसेन, शहडोल, बालाघाट, खंडवा और खरगोन सहित कई जिले शामिल हैं। एडीएम जैसे वरिष्ठ पदों के रिक्त रहने से राजस्व प्रशासन, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और विकास योजनाओं की निगरानी पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। वहीं संयुक्त कलेक्टर और एसडीएम स्तर पर भी रिक्तियों के कारण राजस्व मामलों के निपटारे, लोक सेवा गारंटी और जनसुनवाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मंत्रालय में बढ़ी युवा अधिकारियों की जिम्मेदारी
राज्य प्रशासनिक सेवा में अधिकारियों की कमी के चलते मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में बड़ी संख्या में युवा डिप्टी कलेक्टरों को अवर सचिव, ओएसडी और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर तैनात किया गया है। सामान्य प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, आयुष तथा योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी जैसे विभागों में उन्हें अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सेवा के शुरुआती वर्षों में अधिकारियों को फील्ड स्तर पर अधिक अनुभव मिलना चाहिए, जिससे वे जमीनी प्रशासन की चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
दो साल से नहीं हुई व्यापक पदस्थापना
सूत्रों के अनुसार पिछले करीब दो वर्षों से राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों की फील्ड और मंत्रालय स्तर पर व्यापक पदस्थापना नहीं हुई है। इससे कैडर प्रबंधन प्रभावित हुआ है। कई अधिकारी स्पष्ट दायित्वों के बिना हैं, जबकि अनेक महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हुए हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी शेखर वर्मा का कहना है कि अधिकारियों की लगातार कमी का सीधा असर प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता और गति पर पड़ता है। उनका मानना है कि सरकार को राज्य प्रशासनिक सेवा के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए पदोन्नति प्रक्रिया तेज करनी चाहिए।
स्थानांतरण आवेदन 8 जून तक
इस बीच राज्य शासन की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग ने स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के आवेदन 3 जून से 8 जून तक ई-एचआरएमएस पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदक अधिकतम 15 संस्थाओं या कार्यालयों का विकल्प चुन सकेंगे। आवेदन के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज पीडीएफ स्वरूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 5 जून तक सभी रिक्त पदों की जानकारी ई-एचआरएमएस पोर्टल पर दर्ज की जाए, ताकि स्थानांतरण प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रूप से संचालित की जा सके।
