- आधुनिक केंद्र में दो हजार आवारा श्वानों को रखने की होगी व्यवस्था

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल नगर निगम आवारा श्वानों के प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भोपाल के कालापानी क्षेत्र में प्रदेश का पहला सरकारी श्वान शेल्टर होम बनाया जाएगा। लगभग एक एकड़ भूमि पर बनने वाले इस आधुनिक केंद्र में करीब दो हजार श्वानों को रखने की क्षमता होगी।
कोई सरकारी शेल्टर होम नहीं
अभी तक मध्यप्रदेश में आवारा श्वानों के लिए कोई सरकारी शेल्टर होम नहीं है। ऐसे में नगरीय निकायों का अमला श्वानों को पकडक़र नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उसी क्षेत्र में छोड़ देता है। सडक़ों पर घूमने वाले श्वानों के कारण लोगों को काटने और सडक़ हादसों की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। अधिकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने हिंसक और संक्रमित श्वानों को इंजेक्शन देकर मारने की अनुमति दी है। साथ ही नसबंदी के लिए पकड़े गए श्वानों को वापस रहवासी क्षेत्रों में न छोडऩे के निर्देश भी दिए हैं। इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार से अनुमति मिलने के बाद नगर निगम ने कालापानी क्षेत्र में शेल्टर होम के लिए जमीन चिह्नित कर ली है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही
नगर निगम और संबंधित विभागों द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह केंद्र आधुनिक सुविधाओं और वैज्ञानिक तरीके से संचालित होगा। यहां पशु चिकित्सकों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी। वर्तमान में भोपाल नगर निगम के पास केवल तीन एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर हैं, जो आदमपुर छावनी, अरवलिया और कजलीखेड़ा में संचालित हो रहे हैं। इन तीनों केंद्रों में मिलाकर करीब 600 श्वानों को रखने की सुविधा है। यहां नसबंदी, टीकाकरण और प्राथमिक उपचार के बाद श्वानों को रिकवरी होने पर वापस उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है।
फैक्ट फाइल
– शहर में करीब दो लाख आवारा श्वान
– हर साल लगभग 25 हजार श्वानों की नसबंदी
– नसबंदी पर नगर निगम का सालाना खर्च करीब दो करोड़ रुपये
– अभी केवल 600 श्वानों को रखने की सुविधा
– नसबंदी के बाद वापस उसी क्षेत्र में छोड़ दिए जाते हैं श्वान
रेबीज संक्रमित श्वानों को रखा जा रहा
जहांगीराबाद स्थित आसरा केंद्र में फिलहाल रेबीज संक्रमित श्वानों को रखा जा रहा है। वर्तमान में यहां तीन संक्रमित श्वान निगरानी में हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार रेबीज से संक्रमित श्वान लगभग एक सप्ताह में खुद ही मर जाता है, इसलिए उन्हें मारने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
अधिकारियों का क्या कहना
प्रभारी एसबीएम शाखा प्रमोद मालवीय ने बताया कि श्वानों के लिए शहर में शेल्टर होम बनाया जाना प्रस्तावित है। जमीन चिह्नित कर ली गई है और जल्द ही टेंडर सहित अन्य प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
