जल जीवन मिशन में देरी से बिगड़े हालात

जल जीवन मिशन
  • मप्र गहराने लगा जल संकट…अलर्ट मोड पर राज्य सरकार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भीषण गर्मी के बीच मध्यप्रदेश में जल संकट गहराने लगा है। इंदौर और रतलाम जैसे बड़े शहरों में पानी की कमी को लेकर लोग सड़कों पर उतर चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में पेयजल आपूर्ति से जुड़े पूरे अमले की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। सभी कलेक्टरों को नियमित रूप से पेयजल व्यवस्था की निगरानी करने और संकटग्रस्त क्षेत्रों में तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी बीच जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की योजना पर भी सवाल उठने लगे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने प्रदेश के नौ जिलों में हर घर जल प्रमाणन के लिए आवश्यक तकनीकी तैयारियां, परीक्षण और फील्ड सत्यापन की प्रक्रिया करीब पांच महीने पहले ही पूरी कर ली थी। इसके बावजूद अब तक इन जिलों को औपचारिक रूप से हर घर जल प्रमाणित घोषित नहीं किया गया है।
जानकारी के मुताबिक जिन नौ जिलों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनमें उज्जैन संभाग के सात जिले-उज्जैन, देवास, रतलाम, आगर मालवा, शाजापुर, मंदसौर और नीमच शामिल हैं। इनके अलावा इंदौर और अशोकनगर जिले भी इस सूची में हैं। इन जिलों में शत-प्रतिशत घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने और पानी सप्लाई की तकनीकी तैयारियां पूरी बताई जा रही हैं, लेकिन अंतिम प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिलने से इन्हें अभी तक हर घर जल का दर्जा नहीं मिल पाया है। दरअसल, हर घर जल प्रमाणित घोषित होने के बाद ही सरकार आधिकारिक तौर पर यह मानती है कि जिले के सभी ग्रामीण घरों में नियमित नल जल आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब तकनीकी और फील्ड स्तर की प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं तो प्रमाणन में देरी क्यों हो रही है। दूसरी ओर, जल संकट बढऩे से सरकार पर इन जिलों को शीघ्र प्रमाणित करने का दबाव भी बढ़ रहा है।
ढाई साल में एक भी जिला हर घर जल प्रमाणित घोषित नहीं
मप्र में जल जीवन मिशन की शुरुआत को अगस्त 2026 में सात वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इसके बावजूद अब तक प्रदेश के केवल दो जिले ही पूर्ण रूप से हर घर जल प्रमाणित घोषित हो पाए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जुलाई 2022 में बुरहानपुर प्रदेश का पहला हर घर जल प्रमाणित जिला बना था। इसके लगभग 11 महीने बाद जून 2023 में निवाड़ी को दूसरा प्रमाणित जिला घोषित किया गया। वर्तमान मोहन सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में अब तक एक भी नए जिले को यह दर्जा नहीं मिला है। जबकि प्रदेश में कुल 55 जिले हैं और सरकार का दावा है कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल योजनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में दो प्रकार की योजनाओं पर काम चल रहा है-एकल नल-जल योजनाएं और समूह नल-जल योजनाएं। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में 28 हजार से अधिक एकल नल-जल योजनाओं का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह का कहना है कि विभाग ने एकल नल-जल योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है और जहां भी संचालन संबंधी दिक्कतें हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। वहीं समूह नल-जल योजनाओं की कुल संख्या 147 है, जिनमें अब तक लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया गया है। इन योजनाओं को पूरा करने की अंतिम समय सीमा मार्च 2027 निर्धारित की गई है। समूह योजनाएं विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए बनाई गई हैं जहां बड़े जल स्रोतों से कई गांवों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया जाता है।

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