- पंजीयन शुल्क में छूट का गणित…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
अब संपत्ति में महिलाएं बराबर की हकदार बन गई हैं, हर क्षेत्र में वर्चस्व बनाने के साथ ही प्रॉपर्टी में जमकर निवेश कर रही हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच साल में महिलाओं के नाम जमकर रजिस्ट्रियां हुई हैं। इन सालों में प्रॉपर्टी की 100 प्रतिशत रजिस्ट्री में करीब 45 प्रतिशत रजिस्ट्रियां महिलाओं के नाम पर हैं। ऐसे में अब महिलाएं भी प्रापर्टी में पुरुषों की बराबरी से खड़ी हुई हैं। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक कुल 21 हजार 403 रजिस्ट्रियां हुई हैं, जिनमें से 36.4 प्रतिशत सात हजार 790 पुरुषों के नाम जबकि 44.04 प्रतिशत नौ हजार 426 महिलाओं के नाम हुई हैं।
पंजीयन शुल्क में 2 प्रतिशत की छूट और आसान लोन सुविधा का मिल रहा बड़ा लाभ: जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में प्रापर्टी की रजिस्ट्री करवाने पर पुरुषों को 12.5 प्रतिशत शुल्क चुकाना होता है, जबकि महिलाओं को दो प्रतिशत कम 10.5 प्रतिशत शुल्क चुकाना पड़ता है। इसी का लाभ लेने के लिए लोग घर की महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी के सौदे कर रहे हैं और उनके नाम प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके अलावा महिला के नाम जमीन या प्लाट की रजिस्ट्री होती है तो कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने पर आर्थिक मदद आसानी से मिल जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें तो प्रदेश भर में करीब नौ लाख 44 हजार 549 प्रॉपर्टी के दस्तावेज रजिस्टर्ड किए गए थे, जिनमें सबसे अधिक 44 प्रतिशत चार लाख 22 हजार पांच महिलाओं के नाम रजिस्टर्ड किए गए थे।
बढ़ रहा महिलाओं के नाम रजिस्ट्री का ग्राफ
प्रदेश में प्रॉपर्टी की दरें हर साल बढ़ती जा रही हैं, जिससे प्लाट, जमीन, दुकान सहित अन्य प्रापर्टी को खरीदना आसान नहीं रह गया है। ऐसे में लोग जो भी प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो वह घर की महिलाओं के नाम करते हैं। इससे जब भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाना रहता है तो उसके शुल्क में छूट का लाभ आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा जमीन पर किसी भी तरह का उद्योग या व्यवसाय शुरू करना होता है तो महिलाओं को फाइनेंस कंपनियों से अच्छी मदद मिल जाती है। मध्यप्रदेश में प्रॉपर्टी की खरीदारी में महिलाएं भी बराबर की हिस्सेदारी निभा रही हैं। महिलाओं के नाम पर प्रापर्टी की रजिस्ट्री करवाने पर दो प्रतिशत की छूट पंजीयन शुल्क में निर्धारित है, जिस वजह से महिलाओं के नाम पिछले कुछ सालों में रजिस्ट्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
