- मिलेगा महिलाओं को रोजगार, युवाओं को स्किल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राजधानी भोपाल समेत रायसेन और सीहोर को जोडक़र बड़े टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट कॉरिडोर के विकास की तैयारी तेज हो गई है। प्रशासन अब जिला आधारित सीमित योजना की बजाय पूरे क्षेत्र को एक साझा इंडस्ट्रियल और टेक्सटाइल क्लस्टर के रूप में विकसित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि इस मॉडल के लागू होने से टेक्सटाइल उद्योग, निर्यात कारोबार और स्थानीय रोजगार को नई रफ्तार मिलेगी।
टेक्सटाइल सेक्टर से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
प्रशासन का मानना है कि यदि टेक्सटाइल क्लस्टर, उत्पादन इकाइयों और स्थानीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए तो इससे निर्यात क्षमता में बढ़ोतरी होगी। साथ ही हजारों युवाओं और महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार हो सकेंगे। इससे पूरे भोपाल संभाग की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। युवाओं को इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक तैयार करने के लिए आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों का टेक्सटाइल कंपनियों के साथ तालमेल कराया जाएगा। इसके तहत इंडस्ट्री आधारित स्किल ट्रेनिंग, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद युवाओं को सीधे रोजगार के अवसर मिल सकें।
जरी-जरदोजी से महिलाओं को जोड़ने की तैयारी
इस योजना में महिलाओं के रोजगार पर विशेष फोकस रखा गया है। प्रशासन जरी-जरदोजी और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देकर बड़ी संख्या में महिलाओं को घरेलू और स्वरोजगार आधारित काम से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और पारंपरिक कारीगरी को भी नया बाजार मिलेगा।
मध्यप्रदेश का बड़ा टेक्सटाइल हब बनने की तैयारी
अगर यह क्षेत्रीय मॉडल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में भोपाल, रायसेन और सीहोर मिलकर मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट हब बन सकते हैं। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।
तीन जिलों को जोडक़र बनेगा क्षेत्रीय एक्सपोर्ट मॉडल
कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट एक्शन प्लान को केवल भोपाल तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल उत्पादन और उससे जुड़ी कई महत्वपूर्ण यूनिट्स रायसेन और सीहोर जैसे पड़ोसी जिलों में संचालित हो रही हैं, जबकि भोपाल में इस तरह के प्रतिष्ठान अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में तीनों जिलों को जोडक़र क्षेत्रीय स्तर पर बड़ा और प्रभावी एक्सपोर्ट मॉडल तैयार किया जाएगा।
